■ अनिरुद्ध दुबे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर उनकी उपलब्धियों को पार्टी के लोगों तथा मीडिया के समक्ष रखने केन्द्रीय वस्त्र मंत्री गिरीराज सिंह रायपुर आए हुए थे। गिरीराज सिंह जब मीडिया से मुख़ातिब हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी मौजूद थे। पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मोदी सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला फिर गिरीराज सिंह की बोलने की बारी आई। गिरीराज सिंह ने बात की शुरुआत विष्णदेव साय को तेज तर्रार मुख्यमंत्री कहते हुए की। गिरीराज सिंह के इस संबोधन पर न सिर्फ़ मंच पर आसीन बल्कि नीचे की तरफ बैठे पार्टी के लोगों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। इसलिए कि मुख्यमंत्री साय तो सरल व सहज मुख्यमंत्री माने जाते रहे हैं, फिर तेज तर्रार वाली बात कैसे…
क्रेज़ी हो तो
नेताम जैसा
जाने-माने साहित्यकार मनोहर श्याम जोशी की एक व्यंग्य कृति है ‘नेताजी कहिन’, जिस पर ‘कक्का जी कहिन’ नाम से सीरियल बना था। दिल्ली दूरदर्शन से बरसों पहले कई एपिसोड में प्रसारित हुए सीरियल ‘कक्का जी कहिन’ में नेताजी यानी कक्काजी का किरदार जाने-माने फ़िल्म कलाकार ओम पुरी ने निभाया था और लाज़वाब निभाया था। कक्का जी जैसे कैरेक्टर हमारे आसपास भी देखने मिल जाते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ कृषि मंत्री रामविचार नेताम की कुछ अदाएं क्या ‘कक्का जी कहिन’ के मुख्य पात्र से कम हैं। पिछले दिनों सुशासन तिहार- 2026 में बैकुंठपुर अंतर्गत मनेंद्रगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत मोरगा में जनसमस्या निवारण शिविर लगा था। शिविर में मुख्य अतिथि की हैसियत से जिले के प्रभारी मंत्री एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम उपस्थित थे। उस शिविर का एक वीडियो जमकर वायरल हुआ जिसमें सोफे पर बैठे हुए रामविचार नेताम सामने टेबल पर अपने दोनों पैर रखे आराम की मुद्रा में बैठे हुए हैं और उनके बगल में बैठे बैकुंठपुर विधायक भईयालाल राजवाड़े आम जनता की समस्याएं सुन रहे हैं।
एक किस्सा 2008 का है जब छत्तीसगढ़ में दूसरी बार डॉ. रमन सिंह की सरकार बनी थी और राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में मंत्री मंडल का शपथ ग्रहण समारोह था। समारोह में फ़ेमस फ़िल्म एक्ट्रेस एवं भाजपा नेत्री हेमा मालिनी विशेष अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद थीं। हेमा जी जब मंच के सामने आकर हाथ हिलाते हुए दर्शकों का अभिवादन कर रही थीं तब सूट-बूट पहने रामविचार नेताम उनके बगल में खड़े होकर ख़ास अंदाज़ में फोटो खिंचवाते नज़र आए थे। कोई क्रेज़ी हो तो नेताम जी जैसा।
गांजा तस्करों को क्यूं
लगती है छत्तीसगढ़
की राह आसान…
गांजे तस्करी के मामले में छत्तीसगढ़ ने बेहद प्रसिद्धि हासिल कर ली है। न जाने तस्करों को छत्तीसगढ़ की राह ऐसे कैसे आसान नज़र आती है कि एक प्रदेश से गांजा गाड़ी में भरकर छत्तीसगढ़ से होते हुए दूसरे प्रदेश के लिए निकल पड़ते हैं। वैसे गांजे की बड़ी खपत छत्तीसगढ़ में भी होती है। अपराध की दुनिया की गहरी समझ रखने वाले लोग मज़े लेते हुए छत्तीसगढ़ को ‘गांजागढ़’ भी कहने लगे हैं। ठीक उसी तरह जब ‘उड़ता पंजाब’ फ़िल्म आई थी तो नशे की खपत को लेकर छत्तीसगढ़ को ‘डोलता छत्तीसगढ़’ कहा जाने लगा था। बस्तर से लेकर सरगुजा तक, रायपुर से लेकर धमतरी तक हर तरफ गांजे के तस्कर पकड़े जा रहे हैं। तस्करों ने माल को छिपाने का कई तरह का नुस्खा खोज रखा है। यह अलग बात है कि कभी-कभी पुलिस की मुस्तैदी से कुछ तस्कर गैंग पकड़ा जाते हैं। बलरामपुर जिले में छत्तीसगढ़-उत्तरप्रदेश की सीमा पर जहां चूने की बोरियों के नीचे छिपाकर रखा गया 10 करोड़ का गांजा पकड़ा गया वहीं फैमिली टूर का ताना-बाना रचकर महाराष्ट्र की तरफ गांजा ले जा रहे लोगों को सिहावा पुलिस ने धर दबोचा।
छत्तीसगढ़-उत्तरप्रदेश की सीमा पर बलरामपुर पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त टीम ने हाल ही में 16 चक्का ट्रक से करीब 10 करोड़ का गांजा बरामद किया। गिरोह के मुख्य सरगना ट्रक मालिक सहित दो लोग पुलिस के हाथ लगे। इन गांजा तस्करों ने गांजा पार करने ऐसी योजना तैयार कर रखी थी जिसे देख पुलिस हैरान रह गई। ट्रक के निचले हिस्से में गांजे के 62 बड़े पैकेट बिछाकर रखे गए थे और उसके ऊपर प्लास्टिक की बोरियों में चूना पाउडर भरकर रखा दिया गया था। ताकि कोई तलाशी ले तो हवा न लगे, लेकिन पुलिस तो पुलिस है।
संदेह के आधार सिहावा पुलिस ने सांकरा फॉरेस्ट नाके पर एक कार को रोका। कार में दो पुरुष, एक महिला और दो बच्चे सवार थे। पूछताछ करने पर दोनों पुरुषों ने बताया कि फैमिली टूर पर निकले हुए हैं। पुलिस ने उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया और कार की तलाशी ली। पुलिस का संदेह सही निकला। तलाशी के दौरान कार की डिक्की में भूरे रंग के सेलो टेप से पैक 18 पैकेटों में गांजा मिला। पुलिस ने जब कड़ाई दिखाई तब दोनों पुरुषों ने सच उगला कि गांजा भरकर बोलनगिर, भवानीपटना (ओड़ीशा) से महाराष्ट्र ले जा रहे थे। जब्त गांजा क़रीब 14 लाख का है।
हर किसी को इस
कर्मचारी की ज़रूरत
छत्तीसगढ़ के सामान्य प्रशासन विभाग ने पुराने निर्देशों में संशोधन करते हुए राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों को विधायकों के साथ अटैच करने पर रोक लगा दी है। सांसदों पर यह निर्देश लागू नहीं होगा। हाल ही में जारी हुए आदेश में लिखा है कि “विधायक राज्य के किसी भी जिले में पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं लिपिकीय सहायता के लिए ले सकेंगे, लेकिन मंत्रालय, विभागाध्यक्ष कार्यालयों और अन्य राज्य स्तरीय संस्थानों में पदस्थ कर्मचारियों को उनके साथ अटैच नहीं किया जा सकेगा।“ सरकार ने वर्ष 2019 में जारी निर्देशों के बिंदु क्रमांक-7 में संशोधन करते हुए यह बदलाव किया है।
व्यवस्था में सुधार लाने नया रायपुर की तरफ से इस तरह का कोई कदम उठाया जा रहा है तो उसमें कोई बुराई नहीं। इस आदेश से परे हटकर कुछ बात करें। लिपिक वर्ग की श्रेणी के कुछ लोग ऐसी बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं कि उनकी ज़रूरत पहले, दूसरे, तीसरे फिर चौथे नेता को पड़ती चली जाती है। राजधानी रायपुर में चार नेताओं के साथ काम करने का एक कर्मचारी का रिकॉर्ड बन गया है। लिपिक वर्ग के इस कर्मचारी में प्रतिभा इस कदर कूट-कूटकर भरी है कि वह दोनों ही बड़ी पार्टी के विधायकों के पास रहा। अब भी किसी विधायक के ही पास है।
रायपुर नगर निगम की
झोली में एक ही
दिन में आ गिरे करोड़
रायपुर नगर निगम पर हमेशा से यह कटाक्ष किया जाता रहा है कि आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया। अभी तो फिर भी हालत थोड़ी ठीक है नहीं तो रायपुर नगर निगम पूर्व में कभी उस लंबे दौर से भी गुजरा था जब पहली तारीख़ को वेतन के देने के लाले पड़ जाते थे। एक समय ऐसा भी रहा था जब कोरबा नगर निगम की माली हालत रायपुर नगर निगम से काफ़ी बेहतर रही थी। सच यह है कि रायपुर नगर निगम की माली हालत कोई आज भी ठीक नहीं है लेकिन कभी कोई इच्छा शक्ति दिखा दे तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आ जाते हैं। ऐसा ही उदाहरण दो दिन पहले तब देखने में आया जब रायपुर नगर निगम के राजस्व विभाग ने एक ही दिन में करीब 1 करोड़ 15 लाख की बकाया वसूली कर डाली। यह एक दिनी करिश्मा संबित मिश्रा के निगम कमिश्नर का दायित्व संभालने के बाद हुआ है। बहुत से पार्षद कामना कर रहे हैं कि बड़े साहब की दृढ़ इच्छा शक्ति ऐसे ही आगे भी बने रहे जिससे कि रायपुर नगर निगम दीन हीन वाली छवि से ऊपर उठ सके।

