गुजरात व्दारा ब्लेक लिस्टेड की गई दवा छत्तीसगढ़ में गरीब मरीजों को बांट दी गई… विधानसभा में उठा मामला…

मिसाल न्यूज़

रायपुर। विधानसभा में आज कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि जो दवा गुजरात में ब्लेक लिस्टेड है, छत्तीसगढ़ में उसकी सप्लाई कर गरीब मरीजों के बीच बांटा गया।

प्रश्नकाल में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का सवाल लगा था कि क्या यह सत्य है कि दवा निर्माता कंपनी मेसर्स ‘यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड’ द्वारा प्रदायित ‘एस्पिरिन टैबलेट्स आइपी’ गुणवत्ता मानकों पर विफल होने के कारण गुजरात राज्य व्दारा ब्लैक लिस्टेड की गई थी? यदि हाँ, तो क्या इसकी आधिकारिक सूचना छत्तीसगढ़ शासन या सीजीएमएससी को प्राप्त हुई थी?  क्या यह भी सत्य है कि छत्तीसगढ़ में इसी अमानक औषधि के क्रय एवं आपूर्ति आदेश को त्वरित स्वीकृति प्रदान की गई? यदि हाँ, तो स्थापित वित्तीय नियमों को शिथिल करने हेतु कौन उत्तरदायी हैं? इस प्रतिबंधित अवधि के दौरान या उसके बाद उक्त कंपनी से कुल कितनी मात्रा एवं किस संविदा दर पर दवाएं क्रय की गईं? कुल कितना वित्तीय भुगतान किया गया तथा क्या क्रय-पूर्व अनिवार्य बैच-परीक्षण संपन्न कराया गया था? क्रय नियमों के इस गंभीर उल्लंघन पर विभाग व्दारा दोषी अधिकारियों एवं क्रय समिति के विरुद्ध अब तक की गई दंडात्मक कार्रवाई का पूर्ण विवरण क्या है?

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की तरफ से जवाब आया कि यह सत्य है कि गुजरात मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड व्दारा दवा निर्माता कंपनी मेसर्स यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड के औषधि एस्पिरिन टैबलेट्स आइपी (एस्पिरिन गैस्ट्रो-रजिस्टेन्ट टैबलेट्स आइपी 150 मिलीग्राम एवं एस्पिरिन गैस्ट्रो-रजिस्टेन्ट टैबलेट्स आइपी 75 मिलीग्राम) गुणवत्ता मानकों पर विफल होने के कारण ब्लैक लिस्ट की गई थी। उक्त के संबंध में विगत 25 मार्च को फर्म यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड व्दारा सीजीएमएससी लिमिटेड को सूचना प्राप्त हुई थी। यह सत्य नहीं है कि छत्तीसगढ़ में इसी अमानक औषधि के क्रय एवं आपूर्ति आदेश को त्वरित स्वीकृति प्रदान की गई। सत्य यह है कि सीजीएमएससी लिमिटेड व्दारा फर्म यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड को औषधि एस्पिरिन टेबलट्स आइ‌पी 75 मिलीग्राम (अनकोटेड टैबलेट) की आपूर्ति हेतु क्रय आदेश जारी किया गया था जो कि इंडियन फॉर्माकोपिया 2022 अनुसार गुजरात मेडिकल सर्विसेस कॉपरिशन लिमिटेड द्वारा प्रतिबंधित किये गये औषधि (एस्पिरिन गैस्ट्रो-रजिस्टेन्ट टैबलेट्स आइपी 150 मिलीग्राम एवं एस्पिरिन गैस्ट्रो-रजिस्टेन्ट टैबलेट्स आइपी 75 मिलीग्राम) से भिन्न है। यद्यपि दोनों दवाएं भिन्न हैं तथापि एहतियातन एवं जनहित को दृष्टिगत रखते हुए फर्म व्दारा सूचना प्राप्त होने पर औषधि एस्पिरिन टैबलट्स आइपी 75 मिलीग्राम (अनकोटेड टैबलेट) के जारी किये गये क्रय आदेशों एवं दर अनुबंध को निरस्त कर दिया गया था। उक्त अवधि में कुल 6 करोड़ 89 लाख 36 हजार 162 रुपये का भुगतान किया गया। क्रय पूर्व बैच-परीक्षण कराये जाने का प्रावधान नहीं है अपितु क्रय उपरांत फर्म व्दारा आपूर्ति की गई दवा का वितरण से पूर्व गुणवत्ता परीक्षण कराये जाने का प्रावधान है।  फर्म यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड से उक्त प्रतिबंधित दवा का क्रय नहीं किया गया।

कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने सवाल उठाया कि जो दवा गुजरात में प्रतिबंधित है उसे यहां खरीदने का क्या ज़रूरत थी? स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यहां दो अलग-अलग दवाओं की बात है। दोनों की प्रकृति अलग-अलग है। उदाहरणार्थ शक्कर, ग्लूकोज़ एवं शूगर फ्री देखें तो इनका आशय मीठे से निकलता है लेकिन तीनों की प्रकृति अलग-अलग है। श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि जो दवा गुजरात में ब्लेक लिस्टेड है उसके छत्तीसगढ़ में सप्लाई होने के बाद उसे गरीब मरीजों में बांटा गया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि शत प्रतिशत मानक पर खरी उतरने वाली दवाओं का ही यहां इस्तेमाल हो रहा है। पिछले दो सालों में खरे नहीं उतरने वाले 24 प्रोडक्ट को यहां ब्लेक लिस्टेड किया जा चुका है।

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