अभद्रता करने वाले अफसरों को कटघरे में खड़ा किया जाए…… छन्नी साहू समेत 3 अन्य विधायकों से जुड़ा मामला विधानसभा में गूंजा

मिसाल न्यूज़

रायपुर। विधायक श्रीमती छन्नी साहू के पति चंदू साहू एवं विधायगण प्रमोद शर्मा, शैलेश पांडे तथा शिवरतन शर्मा के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज होने का मामला आज विधानसभा में जमकर गूंजा। मांग उठी कि जिन अफसरों ने विधायक छन्नी साहू के साथ अभद्रता की है उन्हें सदन में बुलाकर कटघरे में खड़ा किया जाए। विधायकों के भारी आक्रोश को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष को आदेश देना पड़ा कि श्रीमती छन्नी साहू एवं प्रमोद शर्मा से जुड़े मामले की पुनः जांच कराई जाए। अध्यक्ष ने छन्नी साहू की सूरक्षा व्यवस्था दुगनी करने के भी निर्देश दिए।

शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायक छन्नी साहू ने कहा कि एक माह हो गए मैंने अपनी सूरक्षा लौटा दी है। जब यहां मेरी ही सूरक्षा नहीं तो भला प्रदेश की अन्य महिलाओं की सूरक्षा की क्या गारंटी? मेरे पति पर गाली गलौच व जान से मारने की धमकी देने जैसा गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। थानेदार व्दारा पूरे प्रकरण में एकपक्षीय कार्रवाई की गई। मेरे व्दारा गृह मंत्री के पास गुहार लगाई गई लेकिन मुझे न्याय नहीं मिला। जनता कांग्रेस के विधायक प्रमोद शर्मा ने कहा कि विधायकों तक पर गैर जमानती धारा लगा दी जाती है, जिसका उदाहरण मैं खुद हूं। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि विधायक छन्नी साहू ने जब गृह मंत्री के समक्ष अपनी पीड़ा रखी थी तभी समस्या का निराकरण हो जाना था। इसके पहले हमारी पार्टी के विधायक शिवरतन शर्मा के खिलाफ भी एफआईआर हो चुकी है। लोगों को चिन्हांकित करके यह सब किया जा रहा है। सरकार मदांध हो चुकी है। कल ही छन्नी साहू को विधानसभा के गेट पर रोक दिया गया। ऐसे में एसपी एवं कलेक्टर के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है।

भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि दुपहिया वाहन से आ रही किसी महिला विधायक को विधानसभा के गेट के अंदर आने नहीं दिया जा रहा था। हमने मध्यप्रदेश की विधानसभा भी देखी थी, जहां एसपी-कलेक्टर को बुलाकर सजा दी गई थी। खुद विधानसभा अध्यक्ष को इतना अधिकार है कि वे सदन में एसपी को सस्पेंड करने की घोषणा कर सकते हैं। कलेक्टर को हटा सकते हैं। जब सदस्य सूरक्षित नहीं हैं तो सदन भी सूरक्षित नहीं है।

जनता कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इसी सदन में कहा है कि कांग्रेस है तो सब कुछ संभव है। कांग्रेस असहमति का भी सम्मान करती है। विधायक प्रमोद शर्मा का जुर्म सिर्फ इतना ही था कि उद्योगपति के गलत काम को लेकर आवाज़ उठाई थी। इसी पर उनके खिलाफ मामला दर्ज कर दिया गया। भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि कोई विधायक सरकारी कार्यक्रम में लगा हो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो जाती है। कांग्रेस विधायक शैलेश पांडे का उदाहरण सामने है। इसी तरह 2019 में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की शिकायत के आधार पर मेरे खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी। भाजपा विधायक नारायण चंदेल ने कहा कि न सिर्फ विधायक बल्कि पत्रकारों पर भी लगातार हमले हो रहे हैं। यहां तक कि सांसद संतोष पांडे एवं पूर्व सांसद अभिषेक सिंह को फरार घोषित कर दिया जाता है।

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि 20 साल के संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिला है। इसी विधानसभा में जब डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल विधानसभा अध्यक्ष थे उन्होंने विधायकों के पक्ष में सुविधा एवं सम्मान समिति बनाई थी। इसी सदन के भीतर उन्होंने एसपी व कलेक्टर को खड़े करने कटघरे बनवाए थे। जो अफसर डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए में उनकी परिक्रमा किया करते थे अब कम से कम उनका फोन तो उन्हें उठाना चाहिए। ऐसे अफसरों के लिए इस सदन में कटघरा बनाए जाने की जरूरत है। जब तक यह नहीं होगा विधायिका का सम्मान बहाल नहीं होगा। डॉ. रमन सिंह ने भी इस बात का समर्थन किया। भाजपा विधायक श्रीमती रंजना डिपेंद्र साहू एवं बसपा विधायक श्रीमती इंदू बंजारे ने भी श्रीमती छन्नी साहू के साथ हुए कथित बुरे व्यवहार को लेकर विरोध दर्ज कराया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि जन प्रतिनिधियों के साथ इस तरह की कार्रवाई होने को मैं उचित नहीं मानता। छन्नी साहू एवं प्रमोद शर्मा वाले मामले में जो प्रकरण दर्ज हैं उनकी पुनः जांच कराई जाए। जांच के बारे में कल सदन के उठने से पहले मुझे अवगत कराएं। आज शाम तक छन्नी साहू को दुगनी सूरक्षा दी जाए। यदि उन्हें दो पीएसओ मिले थे तो उनकी संख्या बढ़ाकर चार की जाए।

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