मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज वरिष्ठ आदिवासी विधायक विक्रम उसेंडी ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि केंवटी-पखांजूर-बांदे- ईरपानार मार्ग की हालत बेहद खराब होने के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं तथा मौतें हो रही हैं। यहां सदन में दुर्घटनाएं नहीं होने की गलत जानकारी पेश की जा रही है।
प्रश्नकाल में विक्रम उसेण्डी का सवाल था कि कांकेर जिले के केंवटी-पखांजूर-बांदे-ईरपानार मार्ग में वर्तमान समय में कितने पुल-पुलिया जीर्ण-शीर्ण स्थिति में हैं? क्या इन पुल-पुलियों के निर्माण कार्य की स्वीकृति हुई है? यदि हां तो कब से निर्माण कितनी-कितनी लागत से किया जाना है? क्या इन पुल-पुलियों के संकरे होने एवं ठीक नहीं होने के चलते इन स्थलों पर कई दुर्घटनाएं घटित हुई हैं? विक्रम उसेन्डी ने आगे कहा कि यह 91 किलोमीटर लंबा मार्ग है। इस मार्ग को नया स्वरुप देने 2010 में शासन की ओर से स्वीकृति दी गई थी। 2013 तक यह काम पूरा हो जाना था। उसके बाद 2013 से 2018 का समय निकल गया तब भी काम नहीं हुआ। आज भी अटका हुआ है। इस मार्ग पर 11 स्थान तो ऐसे हैं जो बेहद खतरनाक हैं।
उप उमुख्यमंत्री (लोक निर्माण) अरुण साव ने जवाब में कहा कि 2010 में भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस मार्ग के लिए स्वीकृति प्रदान की थी। 2011 को कार्यादेश भी जारी हुआ था। 91 किलोमीटर की इस सड़क में 134 पुल पुलिया का निर्माण होना था। काम शुरु भी हुआ था। जो कंपनी काम कर रही थी वह 2018 में काम छोड़कर चली गई। उच्च न्यायालय में मामला लंबित है। ऐसे 11 पुल पुलिया जो एकदम संकरे हैं, उन्हें ठीक करने विभाग ने व्यवस्था की है। दुर्घटना चिन्हित स्थानों पर विशेष मरम्मत मद से भी काम करा रहे हैं। बचे काम को पूरा करने की अनुमति जारी हो गई है। इस बार के बजट में इस बात की घोषणा भी हुई है। इस मार्ग पर दो और नये ब्रिज राज्य मद से स्वीकृत हुए हैं।
विक्रम उसेन्डी ने कहा कि जिस 11 पुल पुलिया की बात कर रहे हैं वह साठ साल पहले के हैं, जहां लगातार दुर्घटनाएं होती हैं। आपके विभाग व्दारा दुर्घटानाएं नहीं होने की जानकारी दी जा रही है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सही है कि दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। विभाग के हिसाब से दुर्घटना की कोई जानकारी नहीं है। मुख्यमंत्री जब पखांजूर गए थे तब भी इस सड़क निर्माण की घोषणा किए थे।
विक्रम उसेन्डी ने कहा कि इस मार्ग पर मोटर सायकल से लेकर छोटा हाथी, ट्रक, स्कार्पियो जैसे वाहनों के दुर्घनाग्रस्त होने की जानकारी सामने आती रही है। लगातार दुर्घटनाओं में मौतें भी होती रही हैं। विभाग के अधिकारी दुर्घटनाएं न होने का गलत उत्तर दे रहे हैं।
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कहा कि हर विधायकों के सवालों पर इसी तरह गलत जानकारियां सामने आ रही हैं। सभापति धरमलाल कौशिक ने कहा कि मार्ग निर्माण के टेंडर तो होते हैं, रेट कम होते ही टेंडर लगाने लगाने वाले चले जा रहे हैं। टेंडर होने के बाद एग्रीमेंट नहीं करते। यही कारण है कि विधायकगण जो प्रयास करते हैं वह विफल हो जाता है।

