बिना पुलिस वैरिफिकेशन लोगों को मेकाहारा व डीकेएस में काम पर रखा गया… लगातार हो रहीं चोरी की घटनाएं… विधानसभा में दिखे धरमलाल कौशिक के आक्रामक तेवर…

मिसाल न्यूज़

रायपुर। बिना पुलिस वैरिफिकेशन के प्लेसमेंट एजेंसी व्दारा उपलब्ध कराये गए कर्मचारियों को राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं डीकेएस में काम पर रखे जाने का मामला आज विधानसभा में उठा। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाया कि किसी एजेन्सी विशेष को लाभ पहुंचाने के मकसद से उनके लोगों को काम पर रख लिया गया। कौशिक ने सवाल उठाया कि मेकाहारा एवं डीकेएस में लगातार चोरी व बच्चों के गायब होने जैसी घटनाएं जो हो रहीं आखिर उसके लिए कौन जिम्मेदार है?

प्रश्नकाल में धरमलाल कौशिक का कहना रहा कि विधानसभा में विगत 12 मार्च को लगे एक प्रश्न के उत्तर में उल्लेखित है कि कॉल-मी प्लेसमेंट एजेंसी व्दारा मात्र 40 कर्मियों का सत्यापन 15 जनवरी 2026 की स्थिति में किया गया। ऐसे किसी भी अनुबंध में क्या पुलिस सत्यापन कराया जाना अनिवार्य है? यदि हाँ तो वर्ष 2024 से कार्यरत कर्मियों का पुलिस सत्यापन नहीं कराये जाने के क्या कारण हैं? वर्ष 2024 से जून 2026 तक बिना पुलिस सत्यापन कराए कितना भुगतान किया गया? पूर्व में विधानसभा में लगाए प्रश्न पर जवाब आया था कि उक्त फर्म को कर्मियों के भुगतान हेतु 14 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया? यदि हां तो अनुबंध का पालन न कर भुगतान की आर्थिक अनियमितता करने तथा अनियमितता पूर्ण भुगतान पाने के लिये कौन-कौन उत्तदायी हैं? 20 जून 2026 की स्थिति में भुगतान की गई राशि कितनी है? संस्थाओं के सुरक्षा कर्मी/प्लेसमेंट कर्मी की वर्ष 2023 से जून 2026 तक अभद्रता/मारपीट/अमर्यादित व्यवहार की शिकायतें कब-कब, किसने, किसको, क्या शिकायत की एवं क्या कार्यवाही हुई? क्या उक्त प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मियों के विरूद्ध थाने में भी शिकायतें हुईं?

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की ओर से जवाब आया कि विगत 12 मार्च  को इसी सदन में दिए गए उत्तर में उल्लेखित है कि कॉल-मी-प्लेसमेंट एजेंसी व्दारा मात्र 40 कर्मियों का सत्यापन 15 जनवरी 2026 की स्थिति में किया गया। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर एवं डी. के. एस. चिकित्सालय रायपुर के अनुबंध शर्तों में कार्यरत कर्मियों का पुलिस सत्यापन कराया जाना उल्लेखित है। वहीं डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर की अनुबंध शर्तों में इसका प्रावधान नहीं है। उक्त संस्थानों में डीकेएस में कार्यरत समस्त कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन करा लिया गया है। इसी अनुक्रम में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में कार्यरत लगभग 80-85 प्रतिशत कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन पूर्ण करा लिया गया है। महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में कार्यरत कुछ कर्मी परिवर्तित होते रहते हैं, फलस्वरूप सत्यापन में विलंब होता है। संस्थाओं के सुरक्षा कर्मी/प्लेसमेंट कर्मी की वर्ष 2023 से जून, 2026 तक अभद्रता/मारपीट/अमर्यादित व्यवहार के शिकायतों की जानकारी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर एवं डी. के. एस. चिकित्सालय रायपुर से निरंक है। डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में वर्ष 2025 में मीडिया कर्मियों एवं प्लेसमेंट एजेंसी के मध्य 25 व 26 मई 2025 की रात विवाद की स्थिति निर्मित हुई थी। घटना उपरांत पुलिस व्दारा कार्यवाही की गई। इसी प्रकार 26 जून को को सीएम हेल्प लाईन नम्बर 1076 में योगेश सिदार द्वारा चिकित्सालय में कार्यरत सफाई कर्मियों के विरूद्ध मरीजों के परिजनों से अमर्यादित व्यवहार की शिकायत की गई थी जिसके संबंध में चिकित्सालय द्वारा प्लेसमेंट एजेंसी को भविष्य में इस प्रकार की घटना कारित नहीं करने की चेतावनी दी गई।

कौशिक बोले- आपने अपने उत्तर में कहा कि 40 लोगों का सत्यापन कराया गया, बाकी का नहीं कराए। जिनका नहीं कराया गया उन्हें भी सरकारी संस्थाओं में काम पर लगा दिया गया। यही कारण है कि लगातार अपराधिक घटनाएं घटित होती रही हैं। क्या वैरिफिकेशन कराए बिना ऐसे लोगों को राशि का भुगतान किया जाना चाहिए? पुलिस  वैरिफिकेशन के बिना इस तरह स्वास्थ्य से जुड़े सरकारी संस्थानों में लोगों को रखना नियमों का उल्लंघन है। इस पर क्या कार्यवाही करेंगे? हमारे अस्पताल असूरक्षित हैं। मेडिकल क़ॉलेज अस्पताल रायपुर व डीकेएस रायपुर में चोरी की घटनाएं होती रहती हैं। महिलाओं के आभूषण निकाल लिए जाते हैं। बच्चों के चोरी होने की शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं। नगदी व मोबाइल चोरी होने के कई मामले सामने आ चुके हैं। यहां तक कि परिजन शव लेने पहुंचे तो गार्डों ने पैसों की मांग की। पूरे छत्तीसगढ़ से लोग मेकाहारा एवं डीकेएस आते हैं। ऐसा लगता है कि किसी एजेन्सी को लाभ पहुंचाने के लिए जान-बूझकर इन घटनाओं को अनदेखा किया जा  रहा है।

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