मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने 136 बिंदुओं वाला अविश्वास प्रस्ताव सामने रखते हुए जमकर सरकार की विफलताएं गिनाई। वहीं भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर तीखे बोल बोले। डॉ. महंत व चंद्राकर ने एक-दूसरे की नाकामी के कई उदाहरण गिनाए।
अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी बात शुरु करते हुए डॉ. महंत ने कहा कि विष्णु देव साय सरकार को 136 हफ्ते हो गए। हम 136 बिन्दुओं वाला आरोप पत्र लेकर आए हैं। डॉ. महंत ने अविभाजित मध्यप्रदेश के समय के पूर्व मंत्री संत कवि पवन दीवान की कविता का अपने भाषण में उल्लेख किया-
चुप-चुप रहकर
सब कुछ सहकर
सबका मान बढ़ाते हैं
बार-बार अपमानित होकर
ग़ैरों का गुणगान कराते हैं
मेहमानों को खूब खिलाकर
चुपचाप सो जाते हैं
इसलिए ही छत्तीसगढ़िया
परबुद्धि कहलाते हैं
छत्तीसगढ़ में सब कुछ है
लेकिन कमी है स्वाभिमान की
मुझसे सही नहीं जाती
ऐसी चुप्पी वर्तमान की…
कविता की परबुद्धि वाली लाइन का डॉ. महंत व्दारा उल्लेख किये जाने पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी एवं भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताई और कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए ऐसी राय कायम नहीं की जाती।
डॉ. महंत ने कहा ये मेरा लिखा नहीं है। ये संत पवन दीवान की कविता है। डॉ. महंत ने मंत्री ओ.पी. चौधरी की तरफ मुखातिब होते हुए कहा कि आप कब पैदा हुए यह मुझे मालूम न, लेकिन यह सच है कि ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ नारा मेरे पिता का दिया हुआ है। हम छत्तीसगढ़ की मूल भावना को सामने रखे रहे हैं तो दूसरों को क्यों पीड़ा हो रही है।
डॉ. महंत ने कहा कि ये अविश्वास प्रस्ताव किसान, महिलाओं, युवाओं के खिलाफ रचे गए षड़यंत्र का दस्तावेज है। 1963 में आचार्य जे.पी. कृपलानी ने नेहरू सरकार के विरुद्ध लोकसभा में अविश्वास पेश किया था। तब खुद नेहरू जी ने उसका स्वागत करते हुए कहा था कि सरकार के ख़िलाफ़ लोकतंत्र में ऐसी स्वस्थ बहस होती रहनी चाहिए। ये अच्छी परम्परा है। 1979 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को ये महसूस हुआ कि सदन में उनकी पहले जैसी स्थिति नहीं रही, उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के पहले ही इस्तीफा देना स्वीकार कर लिया।
डॉ. महंत ने कहा कि 26 जुलाई 2022 को हम लोगों ने एक अहम् निर्णय लिया था। सर्वसम्मति से एक संकल्प लाया था कि हसदेव में आबंटित कोल ब्लॉक को रद्द करते हैं। इस सरकार के मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों की शपथ भी नहीं हुई थी कि उससे पहले हसदेव अरण्य को काटने का सिलसिला शुरू हो गया। हसदेव अरण्य को मध्य भारत का फेफड़ा कहा जाता है। यह वहां के आदिवासियों की आस्था का प्रतीक है। मंत्रि मंडल के अस्तित्व में आने से पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों ने हसदेव को ब्लॉक को खनन के लिए सौंप दिया। पंद्रह हज़ार पेड़ों की कटाई शुरु हो गई। जिस रास्ते से भगवान राम गुजरे उसे उद्योगपति को सौंप दिया गया और हमारे हिस्से में क्या आया हाथी-मानव संघर्ष।
डॉ. महंत ने कहा कि कोरिया जिले में 29 वर्षीय महिला का बलात्कार कर उसे ज़िंदा जला दिया गया। अपनी बात रखने थाने पहुंचे एक व्यक्ति को पीट-पीट कर मार डाला गया। राखी के दिन मुख्यमंत्री के क्षेत्र में रेप की घटना हो गई। इसे जंगल राज न कहें तो क्या कहें। यह सरकार अहंकार में डूबी हुई है। पिछले सरकार के कार्यकाल के न जाने कितने ही कामों को रोक दिया गया। केवल जेब भरने का कार्यक्रम चल रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले ढाई साल में सबसे ज्यादा अहित किसानों का हुआ। बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों को छत्तीसगढ़ को सौंप देने का काम हो रहा है। मुख्यमंत्री आदिवासी हैं, लेकिन पेसा क़ानून की राज्य में क्या हालत है? जहां खनन का काम हो रहा वहां से आदिवासी भगाए जा रहे हैं। राज्य में भू माफिया बढ़ गए हैं। ये पैतृक जमीनें तक छिन ले रहे हैं। अबूझमाड़ में जंगलों की कटाई शुरू हो चुकी है? छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता रहा, लेकिन धान के उत्पादन में यहां के किसान खून के आंसू रो रहे हैं। जो अंग्रेजों के जमाने में नहीं हुआ वह यह सरकार कर ले रही है। धान ख़रीदी में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें आती रही हैं। जशपुर जिले के पचास हज़ार पंजीकृत किसानों में से आठ हज़ार किसान अपना धान नहीं बेच पाये।
डॉ. महंत ने कहा कि भारतमाला परियोजना में पाँच सौ करोड़ रुपए से ज़्यादा का भ्रष्टाचार हुआ है। एक खसरे के कई-कई टुकड़ों में बेचा गया। हमारे पैसों में भ्रष्टाचार हो रहा है तो इसका दोष मैं किसे दूँ? मनमोहन सिंह की सरकार में वनभूमि अधिनियम बना था। पट्टा देने का प्रावधान किया था। इसे भी आप नहीं कर रहे हैं।
डॉ. महंत ने कहा कि महतारी वंदन योजना की वजह से आपकी सरकार बनी। अगर ये योजना नहीं बनती तो आपका राम नाम सत्य हो गया था। बच्चों तक में शराबखोरी की लत पड़ रही है। लगता है एक महीने में एक हज़ार करोड़ रुपये की शराब पिलाकर एक नया कीर्तिमान बनाना चाह रहे हैं। एक मंत्री का वीडियो है मेरे पास, जिसमें वे कहते नजर आ रहे हैं कि शराब से जो पैसा आता है, उसे ही हम महतारी वंदन में देते हैं।
डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि ग़रीब के बच्चों को पढ़ाना बंद किया जा रहा है। दस हज़ार स्कूल बंद कर दिए गए। शिक्षकों की कमी है। एक मंत्री थे जिन्होंने कहा था कि 33 हज़ार स्कूली शिक्षकों की नियुक्ति होगी। आपने उन्हीं को लोकसभा रवाना कर दिया। अपने लोगों के ही प्रति आपका बर्ताव कैसा है जरा उस पर सोच लीजिए। युक्तियुक्तकरण की बात होती है। सच तो यह है कि गुरुजी लोग सड़कों पर घूम रहे हैं। चांपा के आदमी को बस्तर-सरगुजा भेज दिया जाता है। पाठ्य पुस्तक निगम में करोड़ों की किताबें छपवाकर उसे कारखानों या रद्दी में बेच दिया जाता है। उच्च शिक्षा का हाल भी बुरा है। अध्यापकों के पद खाली हैं लेकिन सरकार नया विधेयक ला रही है। इसके बाद किराए की एक खोली में भी कॉलेज खुल सकेगा। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 1 हजारर से अधिक पद खाली हैं। चिकित्सा अधिकारी के 560 और अन्य लोगों के ढाई हजार से अधिक पद खाली हैं। इन पदों को सरकार क्यों नहीं भर रही?
डॉ. महंत ने कहा कि केंद्र सरकार की योजना अंतर्गत बस्तर में सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल बना और आपने उसे पीपीपी मोड पर निजी हाथों को सौंप दिया। हार्ट के मरीज तीन सौ किलोमीटर दूर रायपुर आने पर मजबूर हैं। बस्तर जैसे क्षेत्र में 80 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। गौरेला पेंड्रा में एक डिप्टी कलेक्टर एक अस्पताल में तीन महिलाओं की मौत की जांच करने पहुँच गया। उधारी का डॉक्टर अस्पताल में आकर ऑपरेशन करता था। स्वास्थ्य मंत्री ने उस अधिकारी को खूब डांटा। ग़रीब का बच्चा था जो बन गया डिप्टी कलेक्टर। रामविचार नेताम ने भी उसे दो थप्पड़ जड़ा था। उसकी गलती इतनी थी कि मंत्रियों की ग़लत बात बर्दाश्त नहीं कर पाता था। स्वास्थ्य मंत्री की उसने नहीं सुनी , इसलिए उसे आउट कर दिया गया।
डॉ. महंत ने कहा कि मनरेगा जैसी योजना को आपने कहां पर पहुंचा दिया। लाखों लोगों के पास कोई काम नहीं है। मनरेगा का नाम बदल दिया है। राम के नाम पर किया है तो कुछ नियम भी तो बना लेते। मुख्यमंत्री, मंत्री दिल्ली जाकर गिड़गिड़ा रहे हैं तब भी वहां कोई नहीं सुनता। प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी गड़बड़ी हो रही है। जहां जमीन नहीं है वहाँ भी पैसा दे दिया गया। नागदबरा गांव के बैगा लोगों को राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहते हैं। तीन बैगाओं की मौत हुई थी। खुले में पोस्टमार्टम कर उसे जलने से मौत बता दिया गया। बलरामपुर जिले में एक एसडीएम ने बुजुर्ग को पीटकर मार डाला। सूरजपुर में एक एसडीएम के न्या की फरियाद लेकर व्यक्ति पीट जाता है। राजनांदगांव से राजधानी रायपुर तक खुलेआम गोली चल रही है। राज्य में सूखा नशा गली गली में पहुंच गया। मेरे दूर के रिश्तेदार कि हंसते हंसते मौत हो गई। पिता ने उसे टोकते हुए इतना ही कहा था कि नशा कर क्यों बदनामी कर रहे हो। वह कमरे में गया और फांसी लगा ली।
डॉ. महंत ने कहा 16 जून को कोरिया जिले में हुई हत्या ने दिल दहलाकर रख दिया। रेत की लड़ाई में तीन लोगों की जानें गईं। सक्ती जिले में मोटरसाइकिल से दो लोग एक घर पहुंचे हैं और पूछते हैं कि लड़की कहाँ है? लड़की सामने आती है तो उसे गोली मार दी जाती है। ढाई साल में इतनी बरबादी कैसे हो गई?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नदियां लाइफ लाइन हैं। नदियों को इस तरह खोदते चले जाएंगे तो आने वाला समय कैसा होगा इसकी कल्पना की जा सकती है? शराब को लेकर हमारी सरकार पर तो बहुत आरोप लगा करते थे। अब क्या हो रहा है? एक हज़ार करोड़ की शराब एक दिन में बिक रही है।
डॉ. महंत ने कहा नक्सलवाद के खात्मे पर में धन्यवाद प्रस्ताव लाया गया था। हम उस चर्चा में शामिल नहीं हुए, क्योंकि उस दिन ग़रीब आदिवासी जो मारे गए उनकी चर्चा नहीं की गई। गरीब निर्दोष आदिवासियों की रिहाई का मामला अटका है। बड़े-बड़े हथियार वाले बाहर हैं। डॉ. महंत ने कहा कि बिजली की दरों में मनमानी बढ़ोत्तरी समझ के परे है।
पिछली सरकार नादिर
शाह की तरह
थी- अजय चंद्राकर
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि विपक्ष का काम होता है सत्ता पक्ष को सचेत रखना। ऐसा विपक्ष किस काम का जो सिर्फ औपचारिकता पूरी करने में लगे रहता है। भूपेश बघेल तो मध्यप्रदेश की विधानसभा में भी रहे हैं। वो शायद मेरी बातों को बेहतर समझ रह होंगे। जिनके घर कांच के होते हैं, वो दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंका करते। इतिहास में हम गजनवी, तैमूर, अब्दाली को पढ़ते हैं, लेकिन नादिर शाह के समय दिल्ली में सबसे ज्यादा लूट हुई। पिछली छत्तीसगढ़ की सरकार नादिर शाह की तरह ही थी। नेता प्रतिपक्ष ये बता दें कि उनकी निष्ठा राज्य के प्रति है या किसी एक परिवार के प्रति। कांग्रेस के दो इतिहास लिखे गए हैं। एक आजादी के पहले का और एक बाद का। बहुत पहले कांग्रेस में एक सज्जन हुए थे जो कहते थे कि इंदिरा इस इंडिया, इंडिया इस इंदिरा। फिर एक नेता प्रतिपक्ष हुए, जिन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के कहने पर वह झाड़ू भी लगा सकते हैं।
चंद्राकर ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की तरफ मुखातिब होते हुए पूछा कि नेता जी आपने फ़िल्म ‘धुरंधर’ देखी है? उस फ़िल्म में जमील जमाली की खासियत रहती है कि वह हर किसी का आदमी रहता है। आपने अंबिकापुर में बयान दिया था कि इस बार टी.एस. सिंहदेव के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा, फिर रायपुर में भूपेश बघेल के बयान के बाद आपका पाला बदल गया। नवजोत सिंह सिद्धू ने बयान दिया था कि दिल्ली में पाँच सौ करोड़ रुपये देने पड़ते हैं। कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री का बयान आया था कि हम एक हज़ार करोड़ रुपए दे सकते हैं। एक राज्य में ढाई-ढाई साल में मुख्यमंत्री बदल गए। हमारे यहां के टी.एस. बाबा के पास क्या कमी रह गई थी।
चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का कोषाध्यक्ष तीन साल फ़रार रहा। बगैर कोषाध्यक्ष के पार्टी चलती रही। पूरे देश के राजनीतिक इतिहास में ऐसा उदाहरण कभी देखने नहीं मिला होगा। 76 फीसदी आरक्षण का बिल लाया गया। विधानसभा में इसे पारित किया गया। एक संकल्प आया कि नौंवी सूची में इसे जोड़ा जाए। हमारे पाले में गेंद डालने की कोशिश की गई। केंद्र सरकार पर डाल दिया। अगर दम था तो करके दिखाते था। चंद्राकर ने कि पिछली सरकार में पंचायत मंत्री रहते हुए टी.एस. सिंहदेव ने चिट्ठी लिखकर कहा था कि पैसे की कमी होने की वजह से आठ लाख आवास नहीं बनाए जा सकते। उन्होंने मंत्रि मंडल के नियमों के विरुद्ध मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई थी। भारसाधक मंत्री को विश्वास में लिए बगैर कार्यवाही की गई। थी।
अजय चंद्राकर ने कहा कि आरक्षण में धोखे के बाद छत्तीसगढ़ के इतिहास में नग्न प्रदर्शन पहली बार लोगों ने देखा था। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी के मुद्दे पर प्रदर्शन हुआ था। पिछली सरकार के मुख्यमंत्री ने सीना ठोककर कहा था कि मैं बोधघाट परियोजना शुरू करके रहूँगा। 12 करोड़ रुपए फूंक दिए गए, क्या हुआ? रबी फसल को समर्थन मूल्य पर लेने की बात कही गई थी, लेकिन क्या हुआ? जबकि साय सरकार आते ही पीएससी घोटाले की जांच का निर्णय लिया गया।
चंद्राकर ने कहा कि- भारतमाला परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण भूपेश सरकार में हुआ था। एक भी जमीन का अधिग्रहण साय सरकार में नहीं हुआ। ईडी की कार्यवाही का जिक्र भूपेश बघेल ने किया। मेरे ख़िलाफ़ एक भी नामजद आरोप नहीं है।
चंद्राकर ने कहा मोहसिना किदवई की लड़की की इवेंट कंपनी को चंद्रखुरी में साढ़े पाँच करोड़ रुपए का काम दे दिया गया। कुल 28 करोड़ रुपये उन्हें दिए गए। 246 करोड़ रुपए का गोबर बह गया। चुनाव के दो महीने पहले राजीव मितान क्लब को 144 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए। पिछली सरकार में उद्योग कंपनियों के दस हज़ार करोड़ रुपए के बिजली शुल्क माफ कर दिए गए।
चंद्राकर ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार एकमात्र ऐसी सरकार रही, जिसने कर्ज पटाने के लिए कर्ज लिया। भूपेश सरकार में मुख्यमंत्री तीर्थ योजना को बंद कर जेल दर्शन योजना शुरू हो गई। अधिकारी-नेता जेल जाने लगे। जो जेल से निकलता उसका ऐसा स्वागत होता मानो जंग जीतकर निकला हो।

