‘कैट’ ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र: टैक्स ऑडिट और आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि दो महीने बढ़ाने की मांग

मिसाल न्यूज़

रायपुर। व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के नेशनल वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य अमर पारवानी ने केंद्रीय वित्त मंत्री एवं अध्यक्ष केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को एक औपचारिक ज्ञापन भेजकर आकलन वर्ष 2026-27 (वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और आईटीआर (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि को 2 महीने आगे बढ़ाने का आग्रह किया है।

अमर पारवानी ने बताया कि आयकर पोर्टल की तकनीकी कमियों, यूटिलिटीज के देर से जारी होने और TDS/TCS डेटा के मिलान में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण देश भर के व्यापारी और कर सलाहकार भारी दबाव में हैं। CAIT द्वारा की गई प्रमुख मांगें हैं- टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (Form 3CA/3CB–3CD):- अंतिम तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 30 नवंबर की जाए। इनकम टैक्स रिटर्न (ऑडिट केस):- अंतिम तिथि 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर की जाए। ट्रांसफर प्राइजिंग मामले:- फॉर्म 3 CEB एवं संबंधित रिटर्न के लिए तिथि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 एवं 31 जनवरी 2027 की जाए। तिथि बढ़ाने का मुख्य कारण पोर्टल व यूटिलिटी की देरी है। ऑडिट से संबंधित आईटीआर (ITR – 3, 5, 6) की ऑनलाइन/ऑफलाइन यूटिलिटी काफी देर से (अगस्त 2026 में) उपलब्ध कराई गई, जिससे सीए (CA) और एकाउंटेंट्स को काम करने का पर्याप्त समय नहीं मिला। ग्राहकों और बैंकों द्वारा काटे गए TDS/TCS का विवरण 26A और AIS में समय पर या सही तरीके से प्रदर्शित न होने के कारण मिलान (Reconciliation) में काफी समय लग रहा है। वहीं छोटे व्यापारियों और एमएसएमई (MSME) पर धारा 43 B(h) (एमएसएमई भुगतान नियम) और नए (TDS/TCS ) प्रावधानों के कारण ऑडिट रिपोर्ट (Form 3CD) में अतिरिक्त जानकारी दर्ज करना अनिवार्य हो गया है।

अमर पारवानी समेत कैट के अन्य पदाधिकारियों जितेन्द्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, परमानंद जैन, सुरिन्दर सिंह, जीवत बजाज, अवनीत सिंह, विजय पटेल, राजेन्द्र जग्गी, वासु माखीजा, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी एवं शंकर बजाज ने मांग की है कि त्योहारी सीजन अक्टूबर और नवंबर के दौरान नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार हैं, जो व्यापारियों के लिए साल का सबसे व्यस्त व्यावसायिक समय होता है। करदाताओं को अनुचित जुर्माने (Penalty) और ब्याज के दबाव से बचाने के लिए 30 सितंबर से पहले तिथि बढ़ाने की आधिकारिक घोषणा की जाए।

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