■ अनिरुद्ध दुबे
पूरे देश भर में यात्रियों को हलाक़ान करके रख देने वाली इंडिगो कंपनी की ख़बरों के बीच छत्तीसगढ़ की विमानन सेवाओं से जुड़ा मुद्दा भी सुर्ख़ियों में बना हुआ है। अपने हक़ को लेकर लड़ाई कैसे लड़ी जाती है, ये कोई बिलासपुर वालों से सीखे। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय में बिलासपुर में पृथक रेलवे जोन की मांग को लेकर कभी मामला इस क़दर तूल पकड़ा था कि आंदोलनकारियों ने रेलवे की बोगियां तक जला दी थीं। करोड़ों का नुकसान हुआ था। अब बिलासपुर में हवाई सेवाएं बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। आंदोलनकारी पिछले दिनों दिल्ली तक पहुंच गए और वहां जंतर मंतर में जमकर प्रदर्शन किया। रैली भी निकाली। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत इस आंदोलन में शामिल हुए। मामले की गंभीरता को बिलासपुर के सांसद व केन्द्र सरकार के राज्य मंत्री तोखन साहू ने समझा। उन्होंने केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू से आंदोलनकारियों की मुलाक़ात करवाई। आंदोलनकारियों ने विमानन मंत्री के सामने सीधे-सपाट शब्दों में कहा कि “बिलासपुर की विमानन सेवाओं को बढ़ाने के बजाय कटौती कर दी गई है। सेना से ज़मीन मिलने का मामला सालों से लटका हुआ है, जिससे बिलासपुर एयरपोर्ट का विस्तार नहीं हो पा रहा। सेना से ज़मीन तत्काल दिलवाई जाए। बिलासपुर से दिल्ली रेगुलर फ्लाइट चले। हैदराबाद के लिए नई फ्लाइट शुरु की जाए।“
बंगलादेशी विमान बना
पक्षियों का घोसला
छत्तीसगढ़ में रायपुर-बिलासपुर-अंबिकापुर-कोरबा-रायगढ़-भिलाई एवं जगदलपुर के बीच घरेलू हवाई उड़ानें शुरु करने तथा रायपुर हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय स्वरुप देने की बात कोई आज से नहीं पिछले 14-15 सालों से होती आ रही है। न तो घरेलू उड़ानें कहीं दिखाई दे रही हैं और न ही रायपुर एयरपोर्ट इंटरनेशनल लेवल का बन पाया है। अगस्त 2015 में बड़ी दुर्घटना का ख़तरा देख पायलट ने बंगलादेश के विमान को माना एयरपोर्ट पर उतारकर यात्रियों की जान बचा ली थी। यह विमान ढाका से मस्कट जा रहा था। तब राजधानी रायपुर के कुछ उत्साही मीडिया वालों ने लिख मारा था कि बंगलादेश के विमान के रायपुर एयरपोर्ट पर इस तरह अचानक उतरने से साबित हो जाता है कि यह अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता रखता है। बात आई गई हो गई। अभी तक की स्थिति में रायपुर से विदेश की तरफ उड़ान भरने के लिए कोई विमान सेवा शुरु नहीं हुई है। दस साल से खड़े इस बंगलादेशी विमान में अब पक्षियों ने अपना घोसला बना लिया है। अब दो बातें सुनने आ रही हैं- कबाड़ हो चुके बंगलादेशी विमान की नीलामी होने वाली है और रायपुर एयरपोर्ट को निजी कंपनी के हाथों सौंपने तैयारी चल रही है।
बंगलादेशी विमान से
ज्योत्सना महंत को
नज़र आ रहा ख़तरा
दस सालों से रायपुर एयरपोर्ट पर खड़े बंगलादेशी विमान की वापसी के लिए भारतीय विमानन विभाग ने बंगलादेश के विमानन विभाग से लिखित में कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन वहां से कभी कोई ज़वाब नहीं आया। खड़े रहने का किराया से लेकर अन्य शुल्क 5 करोड़ से ऊपर पहुंच गया है। एक ही जगह पर जंग खाते खड़े इस विमान को लेकर कोरबा सासंद श्रीमती ज्योत्सना महंत की ज़रूर चिंता बढ़ गई है। श्रीमती महंत ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कहा कि “बंगलादेश का विमान का इस तरह खड़े रहना हवाई सूरक्षा के लिए ख़तरा है। उसके बाजू से होकर दिन-रात कितने ही विमान उड़ान भरते हैं।“
रविवार के साथ
बहिष्कार का इतिहास
विधानसभा का शीतकालीन सत्र रविवार 14 दिसंबर से नया रायपुर में नवनिर्मित विधानसभा भवन में शुरु होने जा रहा है, जो कि 17 दिसंबर तक चलेगा। बताया जा रहा है कि पिछले पच्चीस सालों के इतिहास में पहली बार होने जा रहा है कि सत्र की शुरुआत अवकाश के दिन से हो रही हो। रविवार वाले दिन सदन में चर्चा का विषय ‘विज़न 2047’ रखा गया है। कांग्रेस विधायक दल ने ‘विज़न 2047’ पर सवाल खड़े करते हुए पहले ही दिन सदन के बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है। विपक्ष पहले ही दिन बहिष्कार की घोषणा कर दे यह भी अपने आप में एक इतिहास ही है। बाकी 3 दिन सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस विधायक दल ने कुछ ये बिन्दू तय कर रखे हैं- धान खरीदी योजना में व्यापक कुप्रबंधन और अनियमितता, जमीन क्रय विक्रय हेतु बढ़ी हुई कलेक्टर गाईड लाइन दर, संवैधानिक पदों पर आसीन पदाधिकारियों द्वारा संवैधानिक प्रक्रियाओं का अतिक्रमण, खाद्य एवं वन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा अनियमितताएं, लगातार हो रही औद्योगिक दुर्घटनाओं के नियंत्रण में विफलता, बढ़ते प्रदूषण के नियंत्रण में विफलता, स्कूल शिक्षा विभाग में सेवा भर्ती नियम का अतिक्रमण कर स्पेशल एजूकेटर की सीधी भर्ती, उच्च शिक्षण संस्थानों की गिरती रैकिंग, शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में पिछले 21 वर्षों से लंबित व्याख्याताओं की भर्ती, बदतर कानून व्यवस्था, बागबाहरा के किसान मनबोध गाड़ा की आत्महत्या, किसानों से धान खरीदी में प्रति क्विंटल पीछे 7.50 रुपये की अवैध वसूली तथा केंद्रीय पूल में चावल कम लेना।
रायपुर के शाहनवाज़
ने हाफिज़ सईद
का जिया था किरदार
बॉलीवुड अभिनेता अक्षय खन्ना इन दिनों फ़िल्म ‘धुरंधर’ में रहमान डकैत वाले रोल को लेकर काफ़ी चर्चा में हैं। कहा तो ये भी जा रहा है कि अक्षय ने रहमान डकैत का किरदार इस क़दर डूबकर किया है कि फ़िल्म के हीरो रणवीर सिंह को भी पीछे छोड़ दिया है। रहमान डकैत वाला नेगेटिव करैक्टर पाकिस्तानी है। एक और नेगेटिव पाकिस्तानी करैक्टर को लेकर राजधानी रायपुर के एक एक्टर को कभी काफ़ी प्रसंशा मिली थी। आतंकवाद पर केन्द्रित सैफ़ अली ख़ान एवं कैटरिना कैफ़ स्टारर फ़िल्म ‘फैंटम’ में रायपुर के एक्टर शाहनवाज़ प्रधान ने पाकिस्तानी आतंकवादी सरगना हाफिज़ सईद का किरदार निभाया था। माना जाता है शाहनवाज़ ने उस चरित्र को इस तरह जिया था कि हूबहू हाफिज़ सईद लगे थे। 17 फरवरी 2023 को मुम्बई में एक चलते कार्यक्रम के बीच शाहनवाज़ का निधन हो गया। शाहनवाज़ के रायपुर के पुराने साथी अक़्सर उन्हें याद करते हैं।
तोमर पीड़ित संघ से
पहले ‘पत्नी पीड़ित संघ’
राजधानी रायपुर में ब्याजखोरी के नाम पर कई प्रकरणों में पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज़ होने के बाद तोमर बंधुओं की आए दिन नई-नई कहानियां सामने आ रही हैं। धमकियों का दौर अभी भी जारी रहना बताया जा रहा है। बताते हैं तोमर बंधुओं से ब्याज में पैसा उठाने वाले वो लोग जो अपना सब कुछ गंवा चुके हैं, लगातार मिल रही धमकियों के बाद ‘तोमर पीड़ित संघ’ बना लिए हैं और मिलकर लड़ाई लड़ने का फ़ैसला किए हैं। बहुत से तो नहीं, पर कुछ मामलों में रायपुर को जागरुक शहर ज़रूर माना जाता रहा है। यहां ‘संघ’ बनने में देर नहीं लगती। 2003 में प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद नक्सलवाद से निपटने के लिए जब बस्तर में ‘सलवा जुडूम’ की रणनीति बनाई गई थी, तब पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बंगले में लगातार हाज़री देते रहने वाले एक नेता ने ‘पिछड़ा जुडूम’ बनाने का ऐलान कर दिया था। ‘पिछड़ा जुडूम’ की धरातल पर क्या गतिविधियां रहीं आज तक किसी को कुछ नहीं मालूम! वहीं इसी रायपुर शहर में राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टी से जुड़ी रही एक नेत्री का पति अपनी जीवन संगिनी से इस क़दर तंग आ चुका था कि उसने ‘पत्नी पीड़ित संघ’ बनाने की घोषणा कर दी। यह घोषणा यूं ही आई-गई नहीं रही बल्कि इस पर रंग भी चढ़ा। रायपुर के कलेक्टोरेट गॉर्डन में ‘पत्नी पीड़ित संघ’ की पहली बैठक हुई, जिसमें बड़ी संख्या में पत्नी पीड़ित शामिल हुए थे। बताते हैं पत्नियों के आगे पतियों की नहीं चल पाई और ‘पत्नी पीड़ित संघ’ दम तोड़ चुका है।

