■ विधानसभा के शीत सत्र का दूसरा दिन
मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज भाजपा विधायक श्रीमती रेणुका सिंह सरूता ने अपने विधानसभा क्षेत्र भरतपुर सोनहत में मोबाइल टावरों की भारी कमी पर गंभीर सवाल खड़े किए। रेणुका सिंह ने यह कहते हुए अपनी ही सरकार को घेरा कि पिछली बार जब बजट पेश हुआ मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना की घोषणा की गई थी जो आज तक शुरु नहीं हो पाई।
शीतकालीन सत्र के आज दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान श्रीमती रेणुका सिंह का सवाल था कि मुख्यमंत्री टॉवर योजना शुरु करने का उदेश्य क्या है? विधानसभा क्षेत्र भरतपुर सोनहत के कितने गांव में मोबाईल टॉवर नहीं है? मुख्यमंत्री टॉवर योजना अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र भरतपुर- सोनहत के कितने गांवों का चयन किया गया है?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तरफ से ज़वाब आया कि वर्तमान में मुख्यमंत्री टॉवर योजना शुरु नहीं हुई है। दूरसंचार विभाग भारत सरकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार विधानसभा क्षेत्र भरतपुर सोनहत के अंतर्गत लगभग 337 ग्रामों में से 47 ग्रामों में मोबाईल नेटवर्क उपलब्ध नहीं हैं। दूरसंचार विभाग, भारत सरकार से प्राप्त जानकरी अनुसार नेटवर्क विहीन 47 ग्रामों में से 40 ग्रामों को मोबाईल नेटवर्क से जोडने हेतु DBN द्वारा वित्त पोषित योजनान्तर्गत टावर स्थापना का कार्य प्रगति पर है।
श्रीमती रेणुका सिंह ने कहा कि भरतपुर सोनहत विधानसभा क्षेत्र दो जिलों मनेन्द्रगढ़ एवं कोरिया में बंटा हुआ है। वास्तव में इस विधानसभा क्षेत्र में 337 नहीं 410 गांव आते हैं। 110 ग्राम पंचायतें हैं। दोनों ही जिलों में नेटवर्क की भारी समस्या बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने भारत सरकार को पत्र लिखा था। 10 दिसम्बर को 513 नये टावरों की स्वीकृति मिली है। रेणुका सिंह ने कहा कि मनेन्द्रगढ़ जिले के 93 एवं कोरिया जिले के 32 गांवों में नेटवर्क नहीं है। देश में 75 जनजातियां जो चिन्हित हैं उनमें से 5 हमारे विधानसभा क्षेत्र में बसती हैं। इनमें बैगा जनजाति के लोगों की संख्या ज्यादा है। वित्त मंत्री ने 2024-25 का जब यहां बजट पेश किया था घोषणा की थी कि मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना शुरु की जाएगी, जिसमें पहले चरण में 500 मोबाइल टावर लगेंगे। मेज थपथपाकर उस घोषणा का स्वागत किया गया था। वह योजना अब तक शुरु नहीं हो पाई। इस बार जो बजट पेश होना है उसमें फिर से इसे लाया जाए। रेणुका सिंह ने आगे कहा कि भरतपुर सोनहत का आखरी गांव दसेर मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर है जहां टावर नहीं है। किसी का स्वास्थ्य खराब होता है या जानवरों से नुकसान होता है, चिकित्सा सुविधा जुटाने मोटर सायकल से आना पड़ता है। देर होने के कारण मरीज की हालत काफी खराब हो जाती है।

