जल जीवन मिशन में धांधली पर कौशिक ने सरकार को घेरा… घपला करने वालों को बचाया क्यों जा रहा…

मिसाल न्यूज़

रायपुर। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आज तीसरे दिन भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने जल जीवन मिशन में करोड़ों की धांधली होने का आरोप लगाते हुए अपनी ही सरकार को घेरा। कौशिक ने सवाल उठाया कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर घपला करने वाले अफसरों को बचाया क्यों जा रहा है?

प्रश्नकाल में धरमलाल कौशिक का सवाल था कि बिल्हा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत 25 नवम्बर 2025 तक की स्थिति में जल जीवन मिशन के तहत कराये जा रहे ग्रामवार कुल कितने कार्य लक्ष्य के विरूद्ध पूर्ण, अपूर्ण व अप्रारंभ हैं? अपूर्ण/अप्रारंभ कार्यों को कब तक पूर्ण किया जावेगा? इन कार्यों पर कितनी राशि का भुगतान किया गया व कितना भुगतान शेष है? राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (शीर्ष समिति) उच्च पावर समिति की अनुशंसा पर 1 फर्म पर एफआईआर किन आरोप व अनियमितता के आधार पर की गई तथा अन्य फर्मों पर एफआईआर नहीं करने के क्या कारण हैं? निविदा स्वीकृत करने के समय उक्त फर्मों के दस्तावेजों की जांच किन-किन अधिकारियों द्वारा की गई और उनके विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई? इन संस्थाओं को 17 फरवरी  2025 के बाद कितना-कितना भुगतान किया गया है और किनकी अनुमति से किया गया?

उप मुख्यमंत्री (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) अरूण साव की ओर से जवाब आया कि बिल्हा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत 25 नवम्बर 2025 की स्थिति में जल जीवन मिशन के तहत कराये जा रहे 199 ग्रामों में 211 कार्य लक्षित हैं। इसके विरुद्ध 92 कार्य पूर्ण तथा 119 कार्य अपूर्ण हैं। अपूर्ण कार्यों को पूर्ण करने की निश्चित समयावधि बताया जाना संभव नहीं है। इन कार्यों हेतु रू. 11315.34 लाख राशि का भुगतान किया गया है व 316.94 लाख का भुगतान शेष है। राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (शीर्ष समिति) उच्च पॉवर समिति व्दारा 17 फरवरी 2025 की बैठक में की गई अनुशंसानुसार तथा कूटरचित अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के कारण 1 फर्म मेसर्स विजय वी. सालुंखे पर एफआईआर की गई। अन्य 6 फ़र्मों मेसर्स ए.के. कंस्ट्रक्शन, मेसर्स विक्रम टेली इन्फ्रा, मेसर्स, श्री गणपती कंस्ट्रक्शन, मेसर्स आनंद कंस्ट्रक्शन रायपुर, मेसर्स धर्मेश कुमार रायपुर एवं मेसर्स सोमबंसी इनवायरो के व्दारा मेसर्स विजय वी. सालुंखे के व्दारा प्रस्तुत कूटरचित अनुभव प्रमाण-पत्र का ही उपयोग जॉइंट वेंचर में किया गया है। अतः इनके विरुद्ध अनुबंध के प्रावधान अनुसार अनुबंध निरस्त किया गया। उच्च न्यायालय बिलासपुर में पारित निर्णय 27 नवम्बर 2025 के परिपालन में पुनः कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। निविदा स्वीकृत करने के समय सभी 07 फर्मों के दस्तावेजों की जांच खंड स्तर-कार्यपालन अभियन्ता, मंडल स्तर-अधीक्षण अभियंता, परिक्षेत्र स्तर-मुख्य अभियंता एवं तत्पश्चात मिशन संचालक कार्यालय स्तर पर जांच के पश्चात् अनुमोदन किया गया है। संबंधित फ़र्मों के द्वारा प्रस्तुत 100 रु. के स्टांप में दिए गए शपथ पत्र के आधार पर ऑन लाइन प्रस्तुत दस्तावेजों को सही मानते हुए अभिलेखों की जांच की गई है। ऐसे में अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही का प्रश्न ही उपस्थित नही होता है। इन संस्थाओं को 17 फरवरी 2025 के बाद भुगतान नहीं किया गया है। उच्च न्यायालय बिलासपुर में पारित निर्णय 27 नवम्बर 2025 के पालन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने से कूटरचित पाये गये अनुभव प्रमाण पत्र के कारण 11 समूह जल प्रदाय योजनाओं में फर्मों के विरुद्ध अमानत राशि राजसात करने की कार्यवाही लंबित रखी गई है। प्रकरण में उच्च न्यायालय के पारित निर्णय का पालन करते हुए कार्यवाही की जायेगी। इनके अनुबंध निरस्त करने के पूर्व किये गए कार्य के मूल्यांकन के आधार पर मेसर्स ए.के. कंस्ट्रक्शन को रू. 80.80 लाख का भुगतान किया गया है। उच्च न्यायालय के पारित निर्णय के पालन के पश्चात् ही भुगतान की गई राशि की वसूली संबंधी कार्यवाही किया जाना संभव हो सकेगा।

धरमलाल कौशिक ने कहा कि मंत्री का जवाब आया है कि 92 कार्य पूर्ण तथा 119 कार्य अपूर्ण हैं। जब कार्य अपूर्ण हैं, सत्यापन हुआ नहीं है तो भुगतान कैसे कर दिया गया? अरुण साव ने कहा कि ठेकेदार जो बिल सम्मिट करते हैं उसका कई स्तर पर मूल्यांकन होता है। जब जल जीवन मिशन से अलाटमेंट आता है फिर भुगतान होता है। रही बात अपूर्ण की तो जितना काम होता है उतने का ही भुगतान होता है। धरमलाल कौशिक ने कहा कि पहले काम पूरा होने के बाद ठेकेदार भुगतान के लिए घूमा करते थे, अब हालत यह हो गई कि भुगतान कर देने के बाद काम पूरा कराने के लिए ठेकेदार के पीछे घूम रहे हैं। कमेटी ने इन सब मामलों में गलत अनुशंसा की, कूटरचित दस्तावेज बने, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अरबों रुपये का भुगतान हो गया। जांच करा भी रहे हैं तो उस 100 रुपये वाले स्टांप की जो ऑन लाइन हुआ। करवाना है तो कूटरचित दस्तावेजों की जांच करवाएं। जिन कूटरचित दस्तावेजों से करोड़ों का घपला हुआ उन्हें क्यों बचाना चाहते हैं?

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