● कारवां (31 जुलाई 2022)- पूर्ण शराब बंदी जोखिम भरी!

■ अनिरुद्ध दुबे

गुजरात के बोटाद जिले में हुई शराब त्रासदी ने मन को झकझोर कर रख दिया है। हाल ही में वहां ज़हरीली शराब पीकर 33 लोगों ने जान गवां दी। सवाल यह है गुजरात में पूर्ण शराब बंदी है तो फिर वहां इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई? माना यही जा रहा है कि रोक के कारण बोटाद जिले के कुछ गांवों में मिथाइल अल्कोहल में पानी मिलाकर नकली शराब बनाने का धंधा चल रहा था। यह काम वहां लंबे समय से होते आ रहा था। यह घटना छत्तीसगढ़ के लिए सबक है। इस घटना को देखकर यही लग रहा है कि एक झटके में पूर्ण शराब बंदी कर देना खतरे से खाली नहीं होगा। शराब बेचने के ठिकाने कैसे कम से कम हो सकते हैं और शराब की प्रवृत्ति पर कैसे काबू पाया जा सकता है, इस तरफ ज़रूर ठोस पहल करने की ज़रूरत है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जो कहते रहे हैं कि नोटबंदी की तरह हम शराब बंदी नहीं करेंगे वह अब सही लग रहा है। सात राज्यों की सीमा से छत्तीसगढ़ की सीमा लगी हुई है। पूर्ण शराब बंदी हो भी जाए तो बाहर से अवैध शराब आने के कई रास्ते खुले हैं। गांजा एवं अन्य ड्रग्स पड़ोसी राज्यों से यहां पहुंच ही रहे हैं। अभी की स्थिति में आंशिक शराब बंदी का ही रास्ता ठीक है।

दिखा आसंदी का वज़न, पूरे

छह दिन चली विधानसभा

छत्तीसगढ़ विधानसभा का इस बार का मानसून सत्र विपक्षी भाजपा विधायक दल व्दारा लाए गए केवल अविश्वास प्रस्ताव के ही कारण नहीं बल्कि पूरे छह के छह दिन चलने के लिए भी याद किया जाएगा। अब तक देखने में यही आते रहा था कि मानसून और शीतकालीन सत्र पांच दिनों का होता था।  उसमें भी सत्र पूरे पांच दिन नहीं चल पाता था, बल्कि तीन या चार दिन में ही सारे कामकाज निबटा लिए जाते थे। इस बार भी लग यही रहा था कि छह दिन का बजट सत्र पांच दिन में निबट जाएगा। अनुपूरक बजट पेश होने और उस पर चर्चा हो जाने का भी समय जोड़ लें तो माना यही जा रहा था कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत पांचवें दिन अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का समय निर्धारित कर सकते हैं और छठवें दिन की ऐसी ख़ास ज़रूरत नहीं रह जाएगी। यह अलग बात है कि डॉ. महंत ने इस सत्र में भी दिखा दिया कि आसंदी का क्या वज़न होता है। जहां ज़रूरत पड़ी वे सदन में मंत्रियों को उनके विभाग की लचर व्यवस्था को लेकर टोकने से पीछे नहीं रहे और अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का समय छठवें यानी आख़री दिन निर्धारित कर दिए। अंदर की ख़बर रखने वालों के मुताबिक सत्ता पक्ष से जुड़े अधिकतर लोग तो यही चाह रहे थे कि चार या पांच बैठकों में सब कुछ संपन्न हो जाए, पर आसंदी तो आसंदी है। आसंदी यदि कुछ तय कर ले तो फिर बाक़ी की सोच किनारे लग ही जाती है। बहरहाल भाजपा विधायकों के मन में संतोष है कि चलो छह बैठकें होने से सरकार पर हमला करने का भरपूर मौका तो मिला।

कारखानों का प्रदूषण

और देवजी पटेल

रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में न जाने कितनी ही चिमनियां लगातार ज़हरीला धुआं उगल रही हैं, जिस पर कम ही आवाज़ उठ रही है। उद्योगों से होने वाले प्रदूषण पर अख़बारों में कम ही छपता है या टीवी पर कम ही दिखता है। औद्योगिक क्षेत्रों में चंदाखोरों की अलग दुकानदारी चलती आ रही है। 2018 में विधानसभा की निर्वाचित परिषद चुनकर आने के बाद से जब-जब विधानसभा का सत्र हुआ भाजपा नेता देवजी पटेल की ज़रूर याद आई। देवजी पटेल 2003 से लेकर 2018 तक लगातार तीन बार विधायक रहे। तब विधानसभा का ऐसा कोई सत्र नहीं जाता था जब रायपुर के औद्योगिक क्षेत्र में होने वाले प्रदूषण की बात देवजी पटेल ने विधानसभा में न उठाई हो। उनका आरोप हुआ करता था कि प्रदूषण रोकने के लिए फैक्ट्रियों में लगा ईएसपी यंत्र कुछ ही घंटे चलाकर बंद कर दिया जाता है। देवजी भाई भाजपा के विधायक हुआ करते थे और तब उनके सवालों से उन्हीं की तत्कालीन भाजपा सरकार घिरी नज़र आती थी। आज आलम यह है कि सिलतरा एवं अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले काले धुएं के कारण आसपास के रिहायशी इलाकों की छतों पर काली धूल की गहरी परत जम जाती है। कपड़े या खाने की चीजों को छतों पर सुखाना मुश्किल हो गया है। वहां तालाब एवं बोर का पानी तो प्रदूषित हुआ ही है खांसी की शिकायत आम है। इसके अलावा इसी वर्ष 25 फरवरी को सांसद सुनील सोनी ने जिला एवं नगर निगम प्रशासन से जुड़े अफ़सरों की जो बैठक ली थी उसमें रायपुर शहर के भीतर कुछ प्रमुख स्थानों पर स्मॉग टॉवर लगाए जाने पर बातचीत हुई थी। स्मॉग टॉवर वायु प्रदूषण को रोकता है। बातचीत को हुए महीनों बीत चुके। लगता है स्मॉग का मामला फाइलों में ही अटका हुआ है।

रायपुर के देह व्यापार

के लिंक विदेशों से

राजधानी रायपुर की पांच सितारा होटल में पकड़ी गईं दूसरे प्रदेश की 11 कॉल गर्ल को लेकर चर्चा का दौर अभी थमा नहीं है। बल्कि यूं कहें कि अब चर्चा इनको लाने वाली महिला दलाल पर केन्द्रित नज़र आ रही है। बड़ा सवाल यही खड़ा है कि जब ये 11 कॉर्ल गर्ल जीई रोड पर स्थित पांच सितारा हॉटल में ठहराई गईं तो इन्हें बुलाने वाली महिला दलाल खुद दूसरी हॉटल में क्यों ठहरी थी? नेपाल की वह महिला दलाल जब पुलिस की गिरफ्त में आ ही गई तो यह खुलासा क्यों नहीं हो पा रहा है कि जिस हॉटल में वह ठहरी थी उसका नाम क्या है? भले ही महिला का वर्तमान ठिकाना नई दिल्ली बताया जा रहा है लेकिन है तो वह मूलतः नेपाल की। इससे यह भी साफ हो जाता है रायपुर के सैक्स रैकेट के तार विदेशों से जुड़े हुए हैं। इसी ‘कारवां’ कॉलम में पूर्व में रायपुर में पकड़ी गई उजबेकिस्तान की लड़की का उल्लेख किया जा चुका है। पूर्व में रायपुर के रईस मनचले गरम गोश्त की तलाश में नागपुर, मुम्बई, गोवा से लेकर विदेशी मुल्क बैंकाक तक की यात्रा कर लेते थे। अब जब रायपुर में ही बैठे बिठाए ख़ूबसूरत परियां आसानी से उपलब्ध हो जा रही हों तो फिर भला बाहर की उड़ान भरने की क्या ज़रूरत!

मंदिर हसौद का

ख़तरनाक ट्रैफिक

सन्नाटे से भरे नया रायपुर का नाम ले लेकर बेमतलब की शान बघारी जाती है। हकीक़त है यह है कि अभी की स्थिति में तो नया रायपुर खोखला शहर ही है। इसी नये रायपुर से लगकर मंदिर हसौद क्षेत्र है। मंदिर हसौद, हावड़ा-मुम्बई सड़क मार्ग पर स्थित है। स्वाभाविक है कि चौबीसों घंटे यहां से भारी वाहनों का गुज़रना होते रहता है। पता नहीं सिस्टम में क्या कमी है जो मंदिर हसौद की ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पाती है। आए दिन यहां सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। कितनों की जान जा चुकी है और न जाने कितने घायल होते रहे हैं। वक़्त लगा पर रायपुर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर भूरे एवं एसपी प्रशांत अग्रवाल ने कम से कम इस दिशा में सोचा तो। इनके निर्देश पर रायपुर ट्रैफिक डीएसपी के.पी. दीवान मंदिर हसौद पहुंचे और वहां की यातायात व्यवस्था का जायज़ा लिया। ट्रैफिक डीएसपी को देख थाने का स्टाफ, नगर पंचायत के जन प्रतिनिधि और अधिकारी-कर्मचारी भी वहां पहुंच गए। इन सब के बीच ट्रैफिक व्यवस्था को कैसे ठीक किया जाए को लेकर लंबी चर्चा चली। इस बहाने एक शुरुआत तो हुई। अच्छा हो कि यह सब केवल चर्चा तक ही सीमित न रहे। ढंग से इसका क्रियान्वयन भी हो।

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