रायपुर। छत्तीसगढ़ आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के अधिकारियों व्दारा लाभांडी, कचना एवं सड्ढू नगर विकास योजना से संबंधित प्लॉट आबंटन से जुड़े दस्तावेजों को छिपाया जा रहा है। ठाकुर ने कहा कि इस संबंध में सूचना के अधिकार के तहत मेरे व्दारा जानकारी मांगी गई थी। आरडीए की तरफ से जवाब मिला कि प्रक्रियाधीन होने के कारण वर्तमान में जानकारी दिया जाना संभव नहीं। यह योजना अगले पाँच वर्षों तक चलेगी तो क्या आरडीए पूरी अवधि में प्रक्रियाधीन होने का बहाना बनाकर सूचना देने से इंकार करता रहेगा?
संजय ठाकुर ने एक प्रेस नोट जारी कर बताया कि सूचना के अधिकार के तहत 10 अगस्त को जमा किए गए सात आवेदनों पर पहले कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसके कारण उन्हें प्रथम अपील दायर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। आवेदन जमा करने के 65 दिन बाद जवाब दिया गया कि चाही गई जानकारी प्रक्रियाधीन होने के कारण वर्तमान में जानकारी दिया जाना संभव नहीं है। ठाकुर ने कहा कि लाभांडी, कचना एवं सड्ढू नगर विकास योजनाओं के संबंध में गाँवों और खसरा नंबरों के चयन से जुड़ी नोट शीटें, फीजिबिलिटी रिपोर्ट, प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट, तकनीकी अध्ययन और स्थल निरीक्षण रिपोर्ट माँगी गई थीं। साथ ही, योजनाओं से लाभान्वित होने वाले व्यक्तियों या वर्गों की पहचान के लिए किए गए अध्ययन, सर्वेक्षण या विश्लेषण तथा योजनाओं के सामाजिक, आर्थिक, वित्तीय और सार्वजनिक हित से जुड़े मूल्यांकन की प्रतियाँ माँगी गई थीं। इसके अलावा, RDA के संकल्प, राज्य शासन को भेजे गए संपूर्ण प्रस्ताव और राज्य शासन द्वारा जारी स्वीकृति अथवा अनुमोदन आदेश की प्रमाणित प्रतियाँ भी माँगी गई थीं। ये सब उपलब्ध नहीं कराई गईं। ठाकुर ने कहा कि मनमाने तरीके से प्लॉट आवंटित करना संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के सिद्धांत का उल्लंघन हो सकता है। इस योजना में कई लोगों को मनमाने तरीके से बहुमूल्य प्लॉट आवंटित करने का प्रस्ताव रखा गया है। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार जन सूचना अधिकारी के लिए आवेदन का निराकरण करते समय अपना नाम लिखना अनिवार्य है, जो कि नहीं लिखा गया।

ठाकुर ने कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जनहित से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और उसके आधार पर कई मुद्दे उठा चुके हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि उन्हें जानकारी प्रक्रियाधीन होने के आधार पर सूचना नहीं दी जा रही है।

