विधानसभा का बजट सत्रः राज्यपाल ने कहा- नक्सली हिंसा पर रोक, सरकार ने कोरोना का बेहतर किया सामना, शराब की रोकथाम की तरफ भी बढ़े कदम

0 रायपुर एयरपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाएं शुरु करने प्रयास

मिसाल न्यूज़

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के आज पहले दिन राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने अपने अभिभाषण में कहा कि विभिन्न प्रयासों से नक्सली हिंसा की घटनाओं में प्रभावी रोक लगी है। 46 नक्सलवादियों को धराशायी करने तथा 555 नक्सलवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने में बड़ी सफलता मिली है। कोरोना महामारी से निपटना पूरी दुनिया के लिए एक नया अनुभव था। हमारी सरकार ने बहुत तत्परता और दूरदर्शिता के साथ इस चुनौती का सामना किया और बड़े पैमाने पर कोरोना की जांच तथा उपचार की अधोसंरचना बनाई। ये सुविधाएं दर्शाती हैं कि सरकार किसी भी आपात स्थिति से निपटने में सक्षम है। नई आबकारी नीति के तहत नशाबंदी के संबंध में अध्ययन करने हेतु तीन समितियों का गठन किया गया है, जो विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रही हैं। विगत दो वर्षों में 99 शराब दुकानों तथा रेस्टोरेंट बार को बंद किया गया है। प्रदेश में शराब के अवैध कारोबार की रोकथाम के लिए दो नए आबकारी संभाग गठित किए गए हैं, वहीं 28 स्थानों पर आबकारी जांच चौकी संचालित की जा रही है। रायपुर के माना एयरपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाएं तथा अंतरराष्ट्रीय कार्गो सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि हमारी सरकार वास्तव में किसानों, वन आश्रितों और मजदूरों की सरकार है, जिनके आत्म-सम्मान के लिए आय और भागीदारी बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई है। खेती के प्रति लोगों का रुझान लौटना अपने आप में बड़ी सफलता मानी जा रही है। खरीफ वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में अब तक का सबसे बड़ा कीर्तिमान बना है, जिसके अनुसार इस वर्ष लगभग 21 लाख 77 हजार किसानों ने 97 लाख 98 हजार मीट्रिक टन धान बेचा है। किसानों की सुविधाएं और आय बढ़ाने के लिए सरकार ने इस वर्ष 173 नवीन धान खरीदी केन्द्र खोले। समर्थन मूल्य का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया गया। धान के साथ ही अन्य खरीफ फसलों को भी ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ का लाभ लगातार दिया जा रहा है। इसमें उद्यानिकी तथा लघु धान्य फसलों को भी शामिल किया गया है। किसानों को ब्याजमुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए इस वर्ष 5 हजार 900 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अभी तक 85 प्रतिशत राशि दी जा चुकी है। लगभग 6 दशक बाद प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का पुनर्गठन किया गया है, जिससे 725 नवीन समितियां भी कृषि ऋण वितरण व अन्य योजनाओं के संचालन में सहयोग दे रही हैं। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में प्रथम एथेनॉल प्लांट की स्थापना हेतु एमओयू के तहत कार्य प्रगति पर है, वहीं अतिशेष धान से भी एथेनॉल उत्पादन के लिए काफी गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं ताकि धान के बम्पर उत्पादन का बेहतर उपयोग किया जा सके। मेरी सरकार के इन उपायों से किसान परिवारों का मनोबल और उत्साह बढ़ा है। सरकार ने प्रदेश के 14 आदिवासी बहुल जिलों के 25 विकासखण्डों में 1 हजार 735 करोड़ रुपए की लागत से ‘चिराग परियोजना’ की शुरुआत कर दी है, जिससे आदिवासी अंचलों में आजीविका के नए साधन बनेंगे। सरकार ने ‘सुराजी गांव योजना’ के माध्यम से नरवा, गरुवा, घुरुवा, बारी को बचाने का जो संकल्प लिया था, वह सफलता के नए-नए शिखरों को छू रहा है। नाला उपचार के हजारों कार्यों से भू-जल स्तर बढ़ा है। ‘गोधन न्याय योजना’ का लगातार विस्तार किया जा रहा है, जिससे गोबर विक्रेताओं को लगभग 127 करोड़ रुपए की राशि सीधे प्रदान की गई है। वहीं वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट तथा सुपर कम्पोस्ट प्लस उत्पादन, विक्रय तथा इसके उपयोग पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है ताकि रासायनिक खाद की कमी से निपटने में जैविक खाद का विकल्प तैयार किया जा सके। इसके अलावा गोबर से बिजली, प्राकृतिक पेंट तथा अन्य सामग्रियों के उत्पादन और विक्रय को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘ग्रामीण औद्योगिक पार्क’ विकसित किए जा रहे हैं। ‘गोधन न्याय मिशन’ से इस अभियान को नई ऊंचाई मिलेगी। घुरुवा से 6 लाख मीट्रिक टन जैविक खाद का निर्माण किया गया है। 3 लाख बाड़ियों का विकास किया जा चुका है, जिससे गांवों में सब्जी तथा फलों की उपलब्धता बढ़ी है।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार ने ‘राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना’ की शुरुआत इसी वित्तीय वर्ष से करने का वादा भी निभाया है। इस योजना के तहत पंजीकृत व्यक्ति को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपए देने का प्रावधान है, जिसकी पहली किस्त के रूप में प्रथम भुगतान हितग्राहियों को किया जा चुका है। आदिवासी अंचलों में चाय, कॉफी, काजू, तीखुर, अलग-अलग विशेषताओं वाले चावल, उच्च गुणवत्ता के फल, विदेशों में बेचे जाने योग्य पोषक उत्पादों के काम में स्थानीय लोगों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। इससे स्थानीय लोगों और उनके उत्पादों के साथ प्रदेश को भी एक नई पहचान मिली है। सरकार ने वन आश्रित परिवारों को वन संसाधनों के माध्यम से नई शक्ति दी है। तेन्दूपत्ता संग्रहण दर 2500 से बढ़ाकर 4 हजार रुपए प्रतिमानक बोरा करने के अलावा समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाने वाली लघु वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 61 कर दी गई है। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड’ के नाम से 121 उत्पादों के प्रसंस्करण तथा 200 उत्पादों के विपणन की व्यवस्था की गई है। लाख पालन को कृषि का दर्जा दिया गया है। कोदो, कुटकी और रागी के लिए भी समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था की गई है। ‘छत्तीसगढ़ मिलेट मिशन’ के गठन से लघु धान्य फसलों की अपार संभावनाएं आकार लेंगी।

राज्यपाल ने कहा कि ‘बिजली बिल हाफ योजना’ के तहत 40 लाख 56 हजार घरेलू उपभोक्ताओं को 2 हजार 100 करोड़ रुपए से अधिक की छूट मिल चुकी है। 5 लाख 81 हजार किसानों को सिंचाई पम्प कनेक्शन में छूट का लाभ मिल रहा है। वहीं 17 लाख से अधिक परिवारों को 30 यूनिट तक प्रतिमाह निःशुल्क विद्युत आपूर्ति की जा रही है। आर्थिक मंदी और कोरोना काल में प्रदेश के इस्पात उद्योगों को ऊर्जा प्रभार में राहत का लाभ भी दिया गया। सरकार ने ऐसी अधोसंरचनाओं के विकास पर बल दिया है, जिससे अधूरे पड़े कार्य शीघ्रता से पूरे हों और उनका लाभ तुरंत जनता को मिले। इस रणनीति से 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता निर्मित की गई, वहीं बेहतर प्रबंधन से 3 लाख हेक्टेयर से अधिक वास्तविक सिंचाई में वृद्धि की गई है। केलो, खारंग, मनियारी, अरपा-भैंसाझार परियोजनाओं के शेष काम वर्ष 2022 में ही पूर्ण करने का लक्ष्य है। इतना ही नहीं, किसानों पर बरसों से लंबित सिंचाई जल कर की राशि 342 करोड़ रुपए अब तक माफ की गई है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिला है।

राज्यपाल ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के जिलों में सरकारी विभागों में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के जिला संवर्ग के रिक्त पदों पर स्थानीय युवाओं की भर्ती सुनिश्चित की जा रही है। सरगुजा, बस्तर संभाग के जिलों के अलावा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही तथा कोरबा जैसे 14 जिलों में यह व्यवस्था की गई है। विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड का गठन करते हुए भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सरकार ने लोककलाओं, परंपराओं, स्थानीय कौशल, संस्कृति और पर्यटन को समग्रता से देखते हुए ऐसा वातावरण बनाया है, जिसमें संरक्षण के साथ रोजगार के अवसरों को भी समेकित किया जा सके। अनुसूचित वर्गों में आत्मगौरव के संचार के लिए नवा रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह जी एवं बाबा गुरु घासीदास जी के नाम पर स्मारक एवं संग्रहालय स्थापित करने की पहल की गई है। इस क्रम में परंपरागत बुनकरों द्वारा निर्मित गमछे को राजकीय गमछे का दर्जा दिया गया है। प्रदेश में पहली बार वार्षिक सांस्कृतिक कैलेण्डर का निर्माण किया गया है। फिल्म नीति 2021 लागू कर दी गई है। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन दूसरी बार भी सफलतापूर्वक किया गया। चौमासा कार्यक्रम के अंतर्गत 1 हजार 58 सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। ‘छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद’ का गठन कर दिया गया है। ‘लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना’,‘छात्रवृत्ति योजना’, ‘मानस मण्डली प्रोत्साहन योजना’ लागू की गई है।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर ध्यान दिया है। ग्रामोद्योग के परंपरागत आधार को नया आयाम दिया गया है। हाथकरघा वस्त्रों को उचित दाम दिलाने हेतु गोदना-शिल्प, टाई-डाई, इम्ब्राडरी वर्क, मधुबनी आर्ट, स्टेनसिल, कसीदाकारी जैसे प्रिंट को बढ़ावा दिया जा रहा है। बैगा, उरांव, डोंगरिया गोंड एवं लोधी समुदाय में प्रचलित परंपरागत डिजाइन के वस्त्रों को नया जीवन देकर उत्पादन कराया जा रहा है। प्राचीन स्मारकों पर आधारित डिजाइन श्रृंखला जैसे बाबा गुरु घासीदास, जैतखाम, कौशल्या, रामायण, सिरपुर एवं दूधाधारी डिजाइन को कपड़ों में बुनाई कला के माध्यम से उकेरा गया है। केला, अलसी, सीसल, घींचा जैसे प्राकृतिक रेशों से भी वस्त्र निर्माण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ट्राईफेड द्वारा आदिवासी बुनकरों के द्वारा निर्मित वस्त्रों की बिक्री का इंतजाम किया गया है। इसी प्रकार धातु, माटी, बांस आदि सामग्रियों से हस्तशिल्प की परंपरा को भी नई सुविधाओं के साथ नया बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। छत्तीसगढ़ी खान-पान को बढ़ावा देने के लिए 16 जिलों में गढ़कलेवा के नए केन्द्र स्थापित किए गए हैं। कोरोना काल में निःशुल्क चावल वितरण का जो कार्य शुरू किया गया था वह मार्च 2022 तक जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने छोटे भू-खण्डों की खरीद-बिक्री पर रोक हटाई, पंजीयन की प्रक्रिया को सरल किया। बाजार मूल्य दरों को 40 प्रतिशत तक कम किया। आवासीय भवनों के पंजीयन शुल्क में रियायत दी और महिलाओं के पक्ष में पंजीयन कराने पर स्टाम्प शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट दी। इसका लाभ लाखों परिवारों को मिला है और निश्चित तौर पर महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने युवाओं के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया है। इसके लिए 13 हजार 269 ‘राजीव युवा मितान क्लब’ की स्थापना की जा रही है। बिलासपुर में आवासीय तीरंदाजी, हॉकी तथा एथलेटिक अकादमी, रायपुर में गैर आवासीय हॉकी, तीरंदाजी, बालिका फुटबॉल, एथलेटिक तथा धनुर्विद्या अकादमी आदि संस्थाओं के माध्यम से प्रदेश में खेलकूद को भी व्यावसायिक स्तर पर अपनाने की प्रेरणा युवाओं को मिल रही है।

राज्यपाल ने कहा कि ‘राम वनगमन पर्यटन परिपथ’ के विकास के संकल्प को मेरी सरकार बहुत गंभीरता से पूरा कर रही है। प्रदेश के 75 स्थानों को चिन्हांकित किया गया है, जिसमें से प्रथम चरण में 9 स्थानों पर अधोसंरचना विकास का काम किया जा रहा है। रायपुर के निकट ग्राम चंदखुरी में माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार करते हुए इसका लोकार्पण किया गया है। विभिन्न जिलों में पर्यटन विकास कार्यों के लिए भूमि आरक्षित कराई जा रही है, जिसमें निजी निवेशकों, स्थानीय प्रशासन तथा शासन की भागीदारी से समुचित विकास कार्य किए जाएंगे। चंदखुरी, सरोधा दादर, सतरेंगा तथा बालाछापर सरना में जो विकास के कार्य किए गए हैं, उससे पर्यटकों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।

उन्होंने कहा कि समाज कल्याण के क्षेत्र में मेरी सरकार ने नए कदम उठाए हैं। थर्ड जेण्डर लोगों को शासकीय सेवा में चयन हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। थर्ड जेण्डर लोगों को राज्य पुलिस बल में नियुक्ति दी गई है। वहीं अब इनके लिए आश्रय-सह पुनर्वास केन्द्र स्थापित किया जा रहा है, ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य छत्तीसगढ़ है। सरकार के विशेष प्रयासों से जगदलपुर तथा बिलासपुर हवाई सेवा से जुड़ गए हैं। मां दन्तेश्वरी एयरपोर्ट, जगदलपुर से हैदराबाद-जगदलपुर-रायपुर सेक्टर में तथा बिलासा देवी केंवट एयरपोर्ट, बिलासपुर (चकरभाठा) से दिल्ली-जबलपुर- बिलासपुर- प्रयागराज सेक्टर में अब नियमित विमान सेवा का संचालन हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र में विकास के नए द्वार खुले हैं। राज्य शासन द्वारा मां महामाया एयरपोर्ट, अम्बिकापुर दरिमा के रनवे के विकास के लिए 43 करोड़ 98 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। शीघ्र ही एयरपोर्ट का लायसेंस प्राप्त कर यहां से भी घरेलू विमान सेवा प्रारंभ करने की योजना है। प्रदेश में विमानन अधोसंरचना विकास के क्रम में राज्य शासन द्वारा कोरिया जिला में एक नवीन हवाई पट्टी विकसित करने तथा कोरबा जिला में एक व्यावसायिक एयरपोर्ट के विकास की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। माना एयरपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाएं तथा अंतरराष्ट्रीय कार्गो सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए अभिव्यक्ति एप, पुलिसकर्मियों का मानसिक तनाव दूर करने के लिए ‘स्पंदन’ कार्यक्रम, नक्सल प्रभावित अंचलों में 900 से अधिक परिवारों को मुकदमों से मुक्ति, ठगी की आरोपी चिटफण्ड कंपनियों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही से न्याय का विस्तार हुआ है। चिटफण्ड कंपनियों में पैसा जमा करने वाले 17 हजार से अधिक निवेशकों को 11 करोड़ रुपए से अधिक राशि लौटाई जा चुकी है। सरकार ने हर हाथ को काम देने की दिशा में बहुत ही स्पष्ट सोच रखी है, जिसके तहत सरकारी विभागों, अर्द्धसरकारी संस्थाओं में स्थायी भर्ती तथा अन्य माध्यमों से नौकरी के दरवाजे खोले गए हैं। नई औद्योगिक नीति में भी पर्यावरण सम्मत रोजगार प्रधान संस्थाओं को प्राथमिकता दी गई है, जिसके कारण 1 हजार 950 औद्योगिक इकाइयों में लगभग 84 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ तथा लगभग 36 हजार लोगों को रोजगार मिला। इसके अलावा 166 एमओयू के माध्यम से लगभग 78 हजार करोड़ रुपए का पूंजी निवेश तथा 1 लाख 8 हजार लोगों को रोजगार दिया जाना प्रस्तावित है। रोजगार के नए अवसरों के सृजन हेतु ‘छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन’ का गठन किया गया है। जिसके तहत आगामी 5 वर्षों में 15 लाख नए रोजगार के अवसर सृजित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

 

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