● कारवां (13 मार्च 2022)- सिगरेट के पैकेट की तरह इमारतें

■ अनिरुद्ध दुबे

विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2022-23 का अनुमानित बजट पेश करने के बाद अपने भाषण में जानकारी दी कि नवा रायपुर अटल नगर क्षेत्र में ग्रीष्म काल में पानी की समस्या के निराकरण हेतु रविशंकर जलाशय से टीला एनीकट तक पाइप लाइन बिछाने की अनुमानित लागत 106 करोड़ है। इस हेतु नवीन मद में 2 करोड़ का का प्रावधान है। मीडिया व्दारा पूछे जाने पर कि क्या नया रायपुर में पानी पहुंचाने के अलावा और भी बहुत कुछ करने की ज़रूरत नहीं?, मुख्यमंत्री ने खुले मन से स्वीकार करते हुए कहा कि “वहां अभी बहुत कुछ होने से रह गया है। मुख्यमंत्री से लेकर अन्य मंत्रियों के निवास बनने बाक़ी हैं। नया रायपुर को आबाद करने पहले तो मंत्रियों को ही वहां जाना होगा। अभी वहां पर बड़ी-बड़ी बिल्डिगों के अलावा कुछ नहीं। वो बिल्डिंगें भी कैसीं, मानो सिगरेट के पैकेट की तरह। सब पुराने लोगों का किया धरा है।“

यूपी के नतीजे का असर

10 मार्च की सुबह जब पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आने शुरु हुए, उसका असर छत्तीसगढ़ की विधानसभा में चल रहे बजट सत्र में भी देखने को मिला। जब मतगणणा शुरु हुई तभी से यह साफ़ दिखने लगा था कि उत्तरप्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बनने जा रही है। 10 को छत्तीसगढ़ विधानसभा सभा में प्रश्नकाल शुरु होते ही भाजपा विधायकों ने नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया पर तीखा हमला बोला। डहरिया सदन में श्रमिकों के हितों से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे और जोश से भरे भाजपा विधायक उनके जवाब से संतुष्ट ही नहीं हो रहे थे। विशेषकर बृजमोहन अग्रवाल एवं अजय चंद्राकर की तरफ से तीखा शाब्दिक हमला होते दिख रहा था। डहरिया भाजपा विधायकों के सवाल पूछने के तरीके पर सवाल उठा रहे थे तो भाजपा विधायकगण उनके जवाब देने के तरीके पर। बृजमोहन अग्रवाल ने डहरिया पर निशाना साधते हुए कहा कि “दूसरे मंत्री जब जवाब दे रहे होते हैं तब तो बोलने के लिए ख़ूब खड़े होते हो और आज जब खुद के जवाब देने की बारी है तो आवाज़ गायब है।“ अंत में विपक्ष के सदन से वाक आउट के बाद दोनों पक्षों में चल रही तीखी बहस का पटाक्षेप हुआ।

कंपनी कहीं चड्ढा की तो नहीं

‘रेडी टू ईट’ का ठेका महिला स्व सहायता समूह से लेकर नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी को दिए जाने की गूंज विधानसभा तक में सुनाई दी। कई लोगों के दिमाग की घंटी उस समय जोरों से बजी जब भाजपा विधायक सौरभ सिंह ने कहा कि “जिस कंपनी को ‘रेडी टू ईट’ का ठेका दिया जा रहा है वह नोएडा की है।“ सौरभ सिंह के इस बोल के बाद सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों ही तरफ के लोग यह जानने की कोशिश में लगे हैं कि आख़िर नोएडा की यह कंपनी किसकी है? कुछ लोग मासूमियत से यह भी पूछते नज़र आ जाते हैं कि “कहीं यह कंपनी चड्ढा की तो नहीं?”

जूते से कपड़े तक

सब कुछ ज़ोरदार

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। पिछले दिनों रायपुर पश्चिम विधायक विकास उपाध्याय विधानसभा की लॉबी में अलग ही स्वरूप में नज़र आए। घर में शोक के कारण उनके सिर पर बाल नहीं थे। हमेशा की तरह माथे पर लंबा लाल तिलक था और चेहरा पहले से और ज़्यादा दमक रहा था। वहां से गुजर रहे लोगों की निगाहें विकास के चेहरे से ज़्यादा उनके लैस वाले जूतों पर जाकर ठहर रही थी जो  गुलाबी रंग का था। कुछ लोगों ने विकास से पूछ ही लिया इतना चकमता हुआ जूता कहां से खरीदे और यह देसी है या इम्पोर्टेड? विकास तो इस सवाल पर मुस्करा कर रह गए लेकिन एक पूर्व मंत्री जो वर्तमान में विधायक हैं उनकी चर्चा ज़रूर शुरु हो गई। एक जानकार व्यक्ति ने बताना शुरु किया कि “कुर्ते पायजामे से परहेज़ करने वाले वो नेताजी के जूते लाख-पचास हज़ार से नीचे के नहीं होते। फाइव स्टार होटल के शौकीन इन नेताजी को बेहद कीमती कपड़े खरीदना पसंद है। दिल्ली-मुम्बई जाते हैं तो वहां से खरीद लेते हैं और रायपुर में ख़रीददारी करना हो तो मालवीय रोड की फैशनेबल दुकान ज़िंदाबाद।“

फोन तो इनका भी नहीं उठता

खुज्जी विधानसभा की कांग्रेस विधायक छन्नी साहू ने पति की गिरफ़्तारी के विरोध में अपनी ही सरकार के ख़िलाफ मोर्चा खोल दिया था और दी गई सूरक्षा लौटा दी थी। छन्नी साहू का मामला सामने आया तो विधानसभा में विपक्षी भाजपा विधायकगण सवाल उठाने से नहीं चूके कि “आख़िर चल क्या रहा है? शिवरतन शर्मा, शैलेश पांडे एवं प्रमोद शर्मा ये ऐसे विधायक हैं जिनके ख़िलाफ एक के बाद एक एफआईआर हुई। छन्नी साहू को विधानसभा के गेट पर क्या सिर्फ़ इसलिए रोक दिया कि वे चारपहिया वाहन की जगह दो पहिया वाहन पर आईं। ये कैसा इंसाफ़?” छन्नी साहू की जब बोलने की बारी आई तो उन्होंने विधानसभा की अधिकारी दीर्घा में मौजूद एक पुलिस अफ़सर का नाम लेते हुए कहा कि “मैंने हक़ीकत से उन्हें अवगत कराना चाहा लेकिन वे फोन ही नहीं उठाते।“ वहीं दूसरी तरफ अन्य लोगों की यही शिकायत छन्नी साहू से है। लोगों का कहना है कि जब कभी अति महत्वपूर्ण काम के लिए विधायक महोदया को कॉल करो तो उनका मोबाइल नहीं उठता। दूसरों पर उंगली उठाना आसान है, खुद पर अमल करना कठिन।

छत्तीसगढ़ और ‘आप’

पंजाब में चुनावी नतीजे जो आम आदमी की पार्टी के पक्ष में आए उसका हल्का असर दूसरे प्रदेशों में दिखने लगा है। छत्तीसगढ़ में भी। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ में आम आदमी की पार्टी की सक्रियता काफ़ी कम हो चुकी थी। पंजाब के नतीजे आने के बाद ‘आप’ जिन राज्यों में फिर से फ़ोकस करना चाह रही है उनमें छत्तीसगढ़ का भी नाम सुनने मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में ‘आप’ ने महासमुन्द से सुप्रसिद्ध कवि एवं गायक लक्ष्मण मस्तुरिया एवं बस्तर सीट से आदिवासी नेत्री सोनी सोढ़ी को चुनावी मैदान में उतारा था। इन दोनों को कितने वोट मिले ये अलग बात है, लेकिन ये थे तो नामी चेहरे। 2018 के विधानसभा चुनाव में ‘आप’ के कुछ चिंतनशील नेता यह कहते दिख जाते थे कि इस बार हमारी भूमिका ठीक वैसी ही होगी जैसा कि यहां 2003 के चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की थी। 2018 के चुनाव में ‘आप’ छत्तीसगढ़ में कोई छाप तो नहीं छोड़ पाई लेकिन पंजाब के नतीजे के बाद यहां के ‘आप’ नेताओं और दिल्ली के उनके बड़े नेताओं के बीच लगातार बातचीत का दौर ज़रूर शुरु हो गया है। यानी 2023 में छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक बार फिर ‘आप’ अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर सकती है।

मैं दिया तैं मोर बाती

पिछले दिनों दो अफ़सरों के बीच काफ़ी मज़ेदार बातें होती दिखीं। उनकी बातें कुछ इस तरह थीं मानो फ़िल्मी पर्दे पर दो चरित्र संवाद करते नज़र आ रहे हों। पहला- यार, आजकल सरकार एवं मीडिया के बीच संबंध कैसे हैं? दूसरा- इन दिनों सिनेमाघरों में चल रही छत्तीसगढ़ी फ़िल्म ‘मैं दिया तैं मोर बाती’ की तरह। पहला- मैंने तो इस फ़िल्म के बारे में कहीं पढ़ा था हॉरर है? दूसरा- यहां भी तो ‘हॉरर’ है।

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