मन कुरैशी ने कहा- ‘लव लेटर’ वाले उस सुनहरे दौर को मैंने ख़ूब जिया है, राज़ 17 को ख़ुलेगा

मिसाल न्यूज़

छत्तीसगढ़ी फ़िल्मों के स्टार कलाकार मन कुरैशी की बहु प्रतिक्षित फ़िल्म ‘लव लेटर’ 17 जून को प्रदर्शित होने जा रही है। मन कहते हैं- “हालांकि ये मोबाइल फोन का ज़माना है, लेकिन मैंने लव लेटर वाले उस सुनहरे दौर को ख़ूब जिया है। शादी से पहले मैंने अपनी पत्नी को ख़ूब लव लेटर लिखे थे और उन्होंने मुझे। मेरी इस फ़िल्म का नाम ‘लव लेटर’ रहने के पीछे एक राज़ है। फ़िल्म के पर्दे पर आते तक इसे राज़ ही रहने दीजिए।“

‘लव लेटर’ के ऑफर के पीछे की कहानी क्या है और पहली बार इसकी स्क्रीप्ट सुनने पर कैसा फील हुआ, पूछने पर, मन कुरैशी कहते हैं- “प्रोड्यूसर तरूण सोनी यह प्रोजेक्ट लेकर आए थे। पहले इस फ़िल्म का नाम कुछ और रखा जाना था। बाद में मालूम हुआ कि उसका किसी और ने इस्तेमाल कर लिया। जो होता है, अच्छा ही होता है। फिर प्रोड्यूसर अमित जैन जी व तरूण भाई ने मिलकर ‘लव लेटर’ टाइटल फाइनल किया। ‘लव लेटर’ कैंची वर्ल्ड है। यह ज़माना मोबाइल मैसेज, फ़ेसबुक, इंस्टा व वाट्स अप का ज़रूर है लेकिन टाइटल ‘लव लेटर’ क्यूं रखा गया, इसे अभी सस्पेंस रहने देना ही अच्छा होगा। वैसे मैं आपको बता दूं शादी से पहले मैंने अपनी वाइफ को ख़ूब लव लेटर लिखा था। वह भी मुझे लिखा करती थीं। मैं राजनांदगांव में रहता था, वो खैरागढ़ रहती थीं। मैंने खैरागढ़ जाने वाली बस के ड्रायव्हर-कंडक्टर से पहचान कर ली थी। एक बार ऐसा भी हुआ कि वाइफ व्दारा भेजा गया लेटर कहीं पर ड्रायव्हर से मिस हो गया। तब बहुत बुरा फील हुआ था। वो लव लेटर ही रहे हैं जो पूरी लाइफ मुझे गुदगुदाते रहेंगे।“

और फ़िल्मों से ‘लव लेटर’ में क्या अलग माना जाए, इस सवाल पर मन कहते हैं- “जैसा दर्शक चाहते हैं वैसी ही कहानी है। छत्तीसगढ़ी फ़िल्मों का दर्शक अभी गंभीर और संदेशपरक सब्जेक्ट नहीं चाह रहा। उसे ‘आई लव यू’ या ‘हॅस झन पगली फॅस जबे’ जैसे सब्जेक्ट लुभाते रहे हैं। भरपूर मनोरंजन। प्यार, दोस्ती का ताना-बाना, कॉमेडी व चुटकूले। अभी यहां के युवा दर्शकों को यही सब पसंद आ रहा है।“

नायिका सृष्टि तिवारी की ‘लव लेटर’ पहली फ़िल्म है, उनके साथ कैसा तालमेल रहा? इस सवाल पर मन कहते हैं- “सृष्टि अच्छी हैं और तामझाम से दूर रहने वाली लड़की हैं। उनमें किसी तरह का कोई एटीट्यूड नहीं है।“ डायरेक्टर उत्तम तिवारी के साथ आप पांच फ़िल्में कर चुके हैं, जिनमें ‘लव लेटर’ और ‘मिस्टर मजनू’ ज़ल्द प्रदर्शित होने वाली हैं। उनके साथ लगातार फ़िल्में करने का संयोग कैसे बनता चला गया, पूछने पर मन कहते हैं- “यह भी एक रिकॉर्ड है। छॉलीवुड में किसी भी हीरो ने किसी एक डायरेक्टर के साथ पांच फ़िल्में अब तक नहीं की हैं। हम दोनों के बीच कमाल की ट्यूनिंग है। किसी और के बारे में वो सोचते नहीं और जिस फ़िल्म को वो डायरेक्ट कर रहे हों वहां कहानी मैं सुनता नहीं। उनके साथ फ़िल्म करना पिकनिक की तरह लगता है।“

प्रोड्यूसर अमित जैन व तरूण सोनी से जुड़े अनुभवों के बारे में पूछा जाए तो… मन कहते हैं- “अमित जी किसी के काम में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करते लेकिन क्वालिटी के मामले में कहीं पर समझौता भी नहीं करते। एडीटिंग से लेकर कैमरे तक उनका नॉलेज़ देखते ही बनता है। तरूण भाई फ़िल्म डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में बड़ा नाम हैं। वह किसी पल शांत नहीं बैठते। हमेशा अपनी धुन में रहते हैं।“

छत्तीसगढ़ी सिनेमा को समझ पाना कठिन है। कोई फ़िल्म चलती है तो धड़ाके से चलती है, कोई अच्छी कहलाने के बाद भी नहीं चलती। इसे किस रूप में देखा जाए, इस सवाल पर मन कहते हैं- “हमारे यहां टाइमिंग का बड़ा खेल है। इस बार की भीषण गर्मी ने कुछ फ़िल्मों के बिजनेस को प्रभावित किया। जब लाइन से शादी की तारीख़ें हों तब भी फ़िल्म लगाना जोखिम भरा काम होता है। छत्तीसगढ़ के संस्कारों में रचे बसे किसी परिवार में शादी हो तो चार से पांच दिन जश्न चलता है। लोग उसी में मगन रहते हैं। अभी ‘पुष्पा’, ‘आर.आर.आर.’ और ‘केजीएफ’ जैसी साउथ की तीन सुपर-डूपर हिट फ़िल्में आईं। हो सकता है ये फ़िल्में दर्शकों को कुछ समय के लिए दूसरे मूड में ले गई हों। ये तीन ऐसी फ़िल्में हैं जिन्हें कितने ही दर्शकों ने एक के बाद एक देखा। फिर लगातार सिनेमा देखने पर जेब भी तो ख़ाली हो जाती है।

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