बूढ़ातालाब और बदलती काया

■ अनिरुद्ध दुबे

राज्य स्थापना दिवस पर आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्राचीन बूढ़ातालाब के कायाकल्प का लोकार्पण होने जा रहा है। इस अवसर पर शहर के कुछ बुजुर्गों को पुराने दिनों की यादें ताज़ा हो आईं। उनके अनुसार बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण की पहल पहली बार 50 के दशक में तत्कालीन रायपुर नगर पालिका अध्यक्ष तथा बाद में रायपुर विधायक एवं संयुक्त विधायक दल की सरकार में मंत्री रहे शारदा चरण तिवारी ने की थी। बुजुर्ग बताते हैं- “देश की आज़ादी के बाद बूढ़ातालाब व उसके आसपास की तस्वीर कुछ ऐसी थी कि शाम-रात तो क्या, दिन में भी वहां वीरानी नज़र आया करती थी। आज कालीबाड़ी से लगकर जो नेहरु नगर बसा हुआ है वहां तक बूढ़ा तालाब फैला हुआ था। आज जिस जगह पर इंडोर व आउटडोर स्टेडियम है, वह तालाब का ही हिस्सा हुआ करता था। बूढ़ेश्वर मंदिर के आगे दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं थी। यही वजह थी कि बूढ़ेश्वर मंदिर तिराहे से कुछ दूर पर मारवाड़ी श्मशान घाट का निर्माण हुआ था। कालीबाड़ी के आगे पुलिस लाइन से लगकर तीन तालाब हुआ करते थे। उनमें से नरैया व उसके बाजू वाला तालाब तो आज भी है, लेकिन कालीबाड़ी चौक से लगकर जो तालाब था उसे पाट दिया गया और वहां बाद में हनुमान नगर बस गया। वहीं बूढ़ातालाब से आगे विशाल महाराजबंद तालाब है। कालीबाड़ी चौक पास वाले तीनों तालाब, बूढ़ातालाब व महाराजबंद तालाब इन सबकी आपस में कनेक्टिविटी थी। एक तालाब ओवर फ्लो होता तो उसका पानी दूसरे तालाब में जाया करता। महाराजबंद तालाब का पानी नाले से होते हुए आखरी में खारुन नदी में जाकर मिला करता।

 शारदा चरण तिवारी

रायपुर विधायक व मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे शारदा चरण तिवारी ने पचास व साठ के दशक में बूढ़ातालाब की महत्ता को बखूबी समझा था। उन्होंने बूढ़ातालाब को खाली करवाकर उसकी पहली बार सफाई करवाई थी। तालाब के आसपास घाट का निर्माण करवाया था और बाउंड्रीवाल करवाई थी। बाउंड्रीवाल के ऊपर समुचित प्रकाश व्यवस्था की गई थी। उसी दौर में बूढ़ातालाब के बीचों-बीच गॉर्डन का निर्माण करवाया गया था, जहां आज स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा स्थित है। शारदा चरण तिवारी के पास बूढ़ातालाब एवं उसके आसपास के सौंदर्यीकरण को लेकर व्यापक सोच थी। तिवारी जी के बाद रायपुर नगर निगम से जुड़े कुछ जनप्रतिनिधि भरपूर प्रचार-प्रसार के साथ समय-समय पर बूढ़ातालाब एवं उसके आसपास के हिस्से में सौंदर्यीकरण की दिशा में पहल करते नज़र आते रहे हैं। रायपुर के इतिहास से जो लोग अच्छी तरह परिचित हैं उनका दावा है कि शारदा चरण तिवारी के समय बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण पर जिस दूरदर्शिता के साथ उस जमाने में काम हुआ, वैसी अनूठी पहल दोबारा कभी होते नज़र नहीं आई। बूढ़ातालाब केवल प्रयोग की वस्तु बनकर रह गया। किसी ने परिक्रमा पथ के नाम पर तालाब के किनारे सड़क बनवाई तो किसी ने पर्यटन स्थल का नाम देते हुए उस सड़क को बंद किया। बरसों से बूढ़ातालाब के आसपास तरह-तरह के तामझाम करते हुए उसे सिर्फ समेटे जाने का काम किया जाता रहा। जैसा कि पद पर पहुंचा कोई बड़ा राजनीतिज्ञ अपने विरोधी को किसी निश्चित दायरे में समेटकर रख देता है। श्रीमती इंदिरा गांधी जब प्रधानमंत्री थीं, नारा चला था- “दूर दृष्टि, कड़ी मेहनत पक्का इरादा।” सौंदर्यीकरण तालाब का हो या कहीं और का, जब ये तीन बिन्दू को लेकर आप किसी मिशन पर आगे बढ़ेंगे, तभी ठोस नतीजे पर पहुंच पाएंगे। नहीं तो ये लाइनें समझने के लिए काफ़ी हैं- “कसमें वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या…”

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