● कारवां (26 जून 2022)- गांजे से बिजली

■ अनिरुद्ध दुबे

छत्तीसगढ़ में गांजे की खेती नहीं होती लेकिन फिर भी यह प्रदेश गांजे की तस्करी के लिए बदनाम है। अक्सर पुलिस सूत्रों से यही सुनने आता है कि ओड़िशा से यहां गांजा लाकर खपाया जाता है। और यह कोई आज से नहीं पिछले 30-35 वर्षों से होते आ रहा है। यही नहीं ओड़िशा से लाए गए गांजे की बड़ी खेप छत्तीसगढ़ के रास्ते से उत्तरप्रदेश जाती है। हाल ही में जशपुर नगर क्षेत्र अंतर्गत तपकरा थाना पुलिस ने दो गांजा तस्करों को पकड़ा। उनके पास से क़रीब 40 लाख का गांजा जब्त हुआ। पुलिस का अनुमान है कि बड़ी मात्रा में यह गांजा ओड़िशा से लाया गया था जिसे अंबिकापुर के रास्ते उत्तरप्रदेश ले जाने की तैयारी रही होगी। चर्चा यह है कि गांजे तस्करी को रोकने छत्तीसगढ़ और ओड़िशा दोनों तरफ की पुलिस संयुक्त रूप से बड़ी मुहिम चलाने वाली है। एक और बेहतर काम यह हुआ है कि बिलासपुर में करोड़ों का गांजा जो जब्त होकर रखा था उसे जलाकर वहां के पुलिस विभाग ने 5 मेगावॉट बिजली पैदा कर ली। बिलासपुर में पुलिस व्दारा 12 से 26 जून तक ‘नशे से आजादी’ पखवाड़ा चलाया गया। उसी के अंतर्गत गांजे से बिजली पैदा करने का यह अनोखा प्रयोग हुआ है।

बस्ती दिल वालों की

इलाक़ा चाहत का

विश्वविख्यात राइटर विलियम शेक्सपियर ने शायद ठीक ही लिखा था “लव इज़ ब्लाइंड”- यानी प्यार अंधा होता है। बेंगलुरू से यह ख़बर आई है कि वहां के एक बैंक का मैनेजर डेटिंग ऐप के माध्यम से किसी लड़की के चक्कर में आ गया।  प्यार में इस क़दर पागल हो गया कि उसने बैंक के 5 करोड़ 7 लाख रुपये लड़की के खाते में डायवर्ट कर दिए। हरियाणा सरकार में मंत्री रहे एक दमदार नेता एक ख़ूबसूरत महिला अधिकारी पर फ़िदा हो गए थे। बात शादी तक जा पहुंची। मंत्री ने अपना नाम चांद रखा और महिला ने फिज़ा। इसके बाद इनकी शादी हो गई। इस शादी को मीडिया में काफ़ी कव्हरेज़ मिला था। दोनों की शादी कुछ ही दिनों में टूट गई। मंत्री रह चुके वह नेता आज भी राजनीति में सक्रिय हैं और फिज़ा जिनका असली नाम अनुराधा बाली था की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बिहार के एक वृद्ध प्रोफेसर अपनी एक जवान छात्रा के इश्क की गिरफ्त में आ गए थे, जिसकी देश भर में चर्चा रही थी। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय में एक मंत्री का दिल एक आकर्षक व्यक्तित्व वाली हसीना पर आ गया था। रायपुर नगर निगम में नौकरी पाने की जुगत में भिड़े एक शख़्स ने मंत्री की उस प्रेमिका तक एप्रोच लगा दी थी। वह शख़्स आज नौकरी पर है। वहीं रायपुर का एक भू माफ़िया जिसने कभी राजनीति में भी संभावनाएं तलाशी थी ने अपनी प्रेमिका के नाम पर एक पूरी कॉलोनी ही बसा डाली था। छत्तीसगढ़ के एक काफी पढ़े लिखे नेता का दिल एक ऐसी समाज सेविका पर आ गया था जिसने कभी शराब के ख़िलाफ मुहिम छेड़ रखी थी। चेहरे से शालीन नज़र आने वाले वह नेता कभी मंत्री भी रहे थे। नेता जी उस समाज सेविका को राजनीति में लाना चाहते थे। समाज सेविका का दुर्भाग्य यह रहा कि इसके पहले की वे राजनीति में सक्रिय हो पातीं नेता जी के सितारे गर्दिश में चले गए। नेता जी की चमक फीकी क्या पड़ी समाज सेविका अख़बार या पोस्टरों से ग़ायब ही हो गईं।

विजय, ‘आप’ और दक्षिण

हमेशा से चर्चित रहे छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कर्मचारी नेता विजय कुमार झा 30 जून की शाम रायपुर कलेक्टोरेट के सहायक अधीक्षक पद से रिटायर हो रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष हैं। दोस्ती जमकर निभाते हैं और जिस किसी से पटरी नहीं बैठे तो विरोध दर्ज कराने में भी पीछे नहीं रहते। किसी समय में राजधानी रायपुर के कर्मचारी भवन में कब्जे को लेकर लड़ाई छिड़ी थी तो अपने ही सीनियर कर्मचारी नेता नरेन्द्र सिंह चंद्राकर के खिलाफ एफआईआर कराने से वे पीछे नहीं रहे थे। बूढ़ातालाब के किनारे नये गॉर्डन का निर्माण एवं सड़क चौड़ीकरण के लिए कर्मचारी भवन को ढहा दिया गया तो वे कोर्ट जाने से नहीं चूके। विजय झा ने तय कर लिया है कि नौकरी से सेवानिवृत्त होते ही अरविंद केजरीवाल की पार्टी ‘आप’ ज्वाइन कर लेंगे। झा की दिली इच्छा है कि वे रायपुर दक्षिण से विधानसभा चुनाव लड़ें। यदि झा की नई राजनीतिक पारी शुरु हो भी जाती है तो आम आदमी पार्टी उन्हें रायपुर दक्षिण से अपना उम्मीदवार बनाएगी या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

ठगे गए दीक्षित

चौंकाने वाली ख़बर यह है कि रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के सेवानिवृत्त अधिकारी रविशंकर दीक्षित 89 लाख की ठगी के शिकार हो गए। ठग ने उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़े का लालच दिया था। ठग ने एक बार उनके खाते में मुनाफ़े के दो लाख जमा करवा भी दिये थे। इससे दीक्षित का विश्वास बढ़ गया और उन्होंने पत्नी व बच्चों के नाम से 3 माह में 89 लाख रुपये ठग के खाते में भेज दिए। ठग ने भरोसे में लेने के लिए शुरु में इंटरनेशनल डब्लूआईएएस कंपनी के नाम से फर्जी पेमेंट स्लीप भी दी थी। रायपुर के कोतवाली थाने में मामला दर्ज हुआ है। दीक्षित को क़रीब से जानने वालों के मन में यही सवाल है कि इनके जैसा सुलझा हुआ व्यक्ति आखिर कैसे उस बड़े ठग के लपेट में आ गया। दीक्षित एक बड़े सांस्कारिक परिवार से रहे हैं। उनके बड़े भाई लेफ्टिनेंट अरविंद दीक्षित की भारत-पाक युद्ध के समय शहादत हुई थी। रायपुर नगर निगम के जिस हॉल में सामान्य सभा होती है वहां रायपुर के उन सैनिकों की तस्वीरें हैं, जो शहीद हुए थे। उन तस्वीरों में स्व. अरविंद दीक्षित की भी तस्वीर है। शैलेन्द्र नगर की तरफ के एक वार्ड को अरविंद दीक्षित वार्ड के नाम से जाना जाता है। दीक्षित को आरडीए के अलावा कुछ समय के लिए रायपुर नगर निगम में भी सेवाएं देने का मौका मिला था। आरडीए व निगम दोनों जगहों पर दीक्षित की छवि धीर-गंभीर और कठिन से कठिन मसलों का आसानी से समाधान निकालने वाले अफ़सर के रूप में रही थी। समाधान निकालने के लिए ख्यात रहे यह अफ़सर आज ठग के फैलाए बड़े जाल में उलझकर रह गए हैं।

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