रायपुर। कांग्रेस नेत्री दीप्ति प्रमोद दुबे ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं। उनका मुख्य दायित्व क्षेत्र की समस्याओं को हल करना, विकास कार्यों को गति देना, शिक्षा-स्वास्थ्य-सड़क-बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और संसद या विधानसभा में विधायी कार्यों में सक्रिय भागीदारी करना है। वर्तमान में एक नया चलन देखने मिल रहा है कि भाजपा सांसद एवं विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “गौरवशाली अभियान” में इतने व्यस्त हो गए हैं कि मूल कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
दीप्ति दुबे ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री के विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं और उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजित समारोहों, रैलियों, वर्चुअल मीटिंगों और फोटो-ओपर्चुनिटीज़ में जनप्रतिनिधियों की भारी भीड़ दिखाई देती है। “विकसित भारत”, “आत्मनिर्भर भारत”, “स्वच्छ भारत” या अन्य महत्वाकांक्षी अभियानों की सफलता का जश्न मनाना निश्चित रूप से सराहनीय है। लेकिन जब यह जश्न स्थायी और प्राथमिक कार्य बन जाता है, तो समस्याएं खड़ी हो जाती है। कई सांसद और विधायक अपने क्षेत्र में महीनों से लंबित पड़े सड़क निर्माण, जल संकट, अस्पतालों की दशा, स्कूलों की कमी या बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय दिल्ली या राज्य की राजधानी में “मोदी जी के कार्यक्रम” में भाग लेने में व्यस्त रहते हैं। सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट में मोदी जी की तस्वीरें, उद्धरण और कार्यक्रमों की तस्वीरें भरपूर दिखाई देती हैं, जबकि क्षेत्रीय मुद्दों पर शायद ही कोई अपडेट मिलता है।

