मिसाल न्यूज़
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज हुए एक दिवसीय विशेष सत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शासकीय संकल्प लाया कि “देश की संसद तथा सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिये एक-तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण करते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।“ महिला आरक्षण के इस महत्वपूर्ण विषय पर देर तक चली लंबी चर्चा में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष दोनों तरफ के विधायकों ने हिस्सा लिया। वहीं महिला आरक्षण पर ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत व्दारा अशासकीय संकल्प लाया गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अग्राह्य कर दिया।
सदन की कार्यवाही प्रारंभ होते ही सर्वप्रथम पूर्व विधायक जगेश्वर राम भगत एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य श्रीमती मोहसिना किदवई को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि के बाद दिवंगत सदस्यों के सम्मान में सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित रही। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरु होने पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज का विशेष सामान्य सभा का दिन महत्वपूर्ण है। दर्शक दीर्घा में नगर निगमों की महिला महापौर, महिला नगर पालिका अध्यक्ष एवं महिला पंचायत अध्यक्ष सदन की कार्यवाही देखने के लिए उपस्थित हैं। आज की सदन की कार्यवाही का पूरा प्रसारण रायपुर दूरदर्शन से हो रहा है। जो भी बोलें अच्छा बोलें। सदन की इस कार्यवाही पर प्रदेश की 3 करोड़ की जनता की निगाहें होंगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारी शक्ति के सम्मान एवं महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण के उद्देश्य से देश की संसद तथा सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिये एक-तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण करते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किये जाने हेतु शासकीय संकल्प प्रस्तुत किया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने कहा कि मैंने भी लगभग इसी संदर्भ में अपना संकल्प लाया है। भारत सरकार से अनुरोध है कि लोकसभा व सभी विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण प्रदान किया जाए। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से मेरे व्दारा लाए गये अशासकीय संकल्प का उल्लेख ही नहीं किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विशेष सत्र में विषय पहले से निश्चित रहता है। दूसरा अशासकीय संकल्प इसमें नहीं लाया जा सकता। चूंकि मुख्यमंत्री शासकीय संकल्प ला चुके हैं, इसलिए मैंने आपके व्दारा लाए गए अशासकीय संकल्प को अग्राह्य कर दिया है। इस पर आपत्ति जताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने बोलना शुरु किया ही था कि भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि आसंदी व्दारा स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है और नेता प्रतिपक्ष व्दारा लाए गए अशासकीय संकल्प को अस्वीकृत किया जा चुका है। इसके बाद इस पर कुछ कहने की कोई गुंजाइश बाकी नहीं रह जाती। नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने नियम प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने जो पढ़ा वह संकल्प की श्रेणी में आता ही नहीं है। इस शासकीय संकल्प को किस रुप में स्वीकार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री तो इस सदन में निंदा प्रस्ताव लाने वाले थे। उनके व्दारा लाया गया शासकीय संकल्प विषय से हटकर है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह प्रक्रिया व परंपरा रही है, सदन से बाहर के विषय पर यहां चर्चा नहीं हो सकती। कांग्रेस विधायक देवेन्द्र यादव ने कहा कि कथनी और करनी में अंतर दिख रहा है। सदन के बाहर कुछ और बात हो रही थी और सदन के भीतर कुछ और।

