मिसाल न्यूज़
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज सत्ता पक्ष व्दारा महिला आरक्षण पर लाए गए शासकीय संकल्प कि पर घंटों चर्चा चली। सत्ता पक्ष एवं विपक्ष दोनों तरफ के विधायकों ने एक-एक कर अपनी बात रखी। सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पास नहीं होने के लिए दोनों पक्ष एक दूसरे को उलाहना देने से नहीं चूके।
सत्ता पक्ष व्दारा लाया गया शासकीय संकल्प यूं था कि “देश की संसद तथा सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिये एक-तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण करते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।”
सदन में सर्वप्रथम इस शासकीय संकल्प पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक सुश्री लता उसेंडी ने कहा कि नारी सशक्तिकरण पर मुख्यमंत्री ने यह संकल्प लाया है, जिसका स्वागत करती हूं। देश में आधी आबादी महिलाओं की है। महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा का विशेष सत्र आयोजित किया गया था। 16 अप्रैल को इस बिल पर चर्चा शुरु हुई और 17 अप्रैल को इसे गिरा दिया गया। बिल गिराने वाले इसे लोकतंत्र की जीत बताने लगे। सच्चाई यह है कि इस बिल के गिरने से आधे लोगों का सपना चकनाचूर हो गया। आज वह समय है जिसमें महिलाओं ने पुरुषों के एकधिकार को तोड़ा है। आर्मी में महिलाएं हैं। विश्व में सबसे ज्यादा महिला पायलट भारत में हैं। गायत्री परिवार के आचार्य जी ने महिलाओं को यज्ञ कराने व मंत्रोच्चारण करने का अधिकार दिया। ब्रह्मा कुमारी से जुड़कर हजारों बहनें शांति का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। दक्षिण में अम्मा के पास जो भी जाता है ऊर्जावान होकर कर्म क्षेत्र में लग जाता है। गोस्वामी तुलसी दास जी ने रामचरित मानस में बाली वध वाले प्रसंग में नारी के महत्व का विशेष रुप से चित्रण किया है। लता उसेंडी ने कहा कि कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों ने महिला आरक्षण बिल की उपेक्षा कर अपने स्त्री विरोधी चेहरे को उजागर किया है। ये कहते हैं कि महिला आरक्षण के समर्थक रहे हैं तो फिर 2004 से 2014 के बीच यह बिल कहां था। उस दौर में लोकसभा में एक सांसद ने महिला आरक्षण बिल को फाड़कर बहनों के सपनों को चकनाचूर किया था। प्रधानमंत्री जब नये सांसद भवन में इस बिल को लेकर आए तो विपक्ष ने इसे चुनावी स्टंट ठहराया। जब उनकी सरकार रही थी तो उस समय इसे क्यों पास नहीं किया गया। ये कहते हैं कि पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण हमने ही लाया। इन्होंने उतना ही दिया जहां तक उन्हें खतरा नहीं था। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जब मुख्यमंत्री थे उनके समय में महिलाओं के लिए पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू हुआ। इसके लिए मैं उन्हें तथा तत्कालीन पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर को बधाई देती हूं।
लता उसेंडी ने कहा कि देश शाहबानो प्रकरण को भूला नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो के पक्ष में फैसला दिया था। इस फैसले को पलटने के लिए लोकसभा में बिल ले आया गया। शाहबानो को भरण पोषण से वंचित किया गया। कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों को हमेशा से डर सताते आया है कि मुस्लिम समुदाय का वोट दूर न हो जाए। भाजपा ने कभी वोट बैंक की राजनीति नहीं की।
पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक श्रीमती अनिला भेंडिया ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कांग्रेस ने 33 प्रतिशत आरक्षण का हमेशा से समर्थन किया है। 2023 में जब लोकसभा में इस पर बिल आया तो कांग्रेस ने समर्थन भी किया था। कांग्रेस का कहना था कि 2027 की जनगणना पर आरक्षण करिये, उस पर हम साथ हैं। प्रधानमंत्री नारियों को कमजोर समझते हैं। 2023 में इस बिल को लागू करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई गई। महिला आरक्षण लागू करने की नीयत होती तो इससे परिसीमन को नहीं जोड़ा जाता। सन् 1989 में पंचायतों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दिया था। हम 33 प्रतिशत लाए, तभी आप उसे 50 प्रतिशत तक पहुंचा पाए। हम खुद पंचायत से चुनकर आए हैं। सामाजिक न्याय की बात करते हैं। सत्ता पक्ष कैसे भूल रहा है कि जनगणना जो हो रही है उसमें ओबीसी का कॉलम तक नहीं रखा गया है। कांग्रेस ही वह पार्टी है जिसने देश को पहली प्रधानमंत्री, पहली महिला राष्ट्रपति व पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष दिया। 2023 वाली स्थिति को ध्यान में रखते हुए यदि महिला आरक्षण बिल लागू किया जाता है तो कांग्रेस उसका समर्थन करती है।
भाजपा विधायक श्रीमती भावना बोहरा ने कहा कि 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने का जिन लोगों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया था उस दृश्य को याद कर मन पीड़ा से भर जाता है। 2023 का यहां हवाला दिया रहा है उस समय लोकसभा में गोमती साय जी व रेणुका सिंह जी उपस्थित थीं। उनसे जब बात होती है तो वे बताती हैं कि 2023 में जब यह बिल लोकसभा में आया था हमें काफी गर्व महसूस हो रहा था। इसलिए कि उस ऐतिहासिक पल के हम गवाह बनने जा रहे थे। दुख है कि उस ऐतिहासिक पल के गवाह नहीं बन पाए। लंबे समय तक एक ही परिवार का राज चला। उन्हें हमेशा डर रहा कि कहीं सत्ता न छिन जाए। विपक्ष सवाल उठा रहा है कि वर्तमान में लोकसभा की सीटें 543 हैं, आरक्षण उस आधार पर क्यों नहीं? सरकार का मानना है कि बिना जनगणना व बिना परिसीमन के इसे लागू करना असंवैधानिक होगा। 543 में लागू कर देने की स्थिति में कई राज्यों में नारी शक्ति का नुकसान हो सकता है। बिल गिरने के बाद प्रियंका वाड्रा व उनके सहयोगी सदस्य मेज थपथपा रहे थे। आने वाले समय में उन्हें प्रकोप झेलना पड़ेगा। राहुल गांधी व के.सी. वेणुगोपाल जैसे नेता तो सदन से भाग निकले। इन लोगों को डर है कि किसी मजदूर या गरीब की बेटी लोकसभा में पहुंच गई तो कहीं इनका इको सिस्टम खराब न हो जाए। 2029 के चुनाव के लिए इन लोगों ने खुद ही अपनी कब्र खोद डाली है।
कांग्रेस विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा ने कहा कि देश में पहली प्रधानमंत्री व पहली मुख्यमंत्री हमारी पार्टी से निकलीं। छत्तीसगढ़ में आज बच्चियां असूरक्षित हैं। गैंग रेप हो रहे हैं। भाजपा के लोग सिर्फ वोट की राजनीति करना चाहते हैं। महिला आरक्षण विधेयक का हमने कभी विरोध नहीं किया। जब 2023 में इस विधेयक के लागू होने की स्थिति बन चुकी थी तब फिर परेशानी क्यों थी। महिला आरक्षण विधेयक पहले लागू कर देते, परिसीमन बाद में कर लेते। मोदी जी जान रहे हैं कि 543 सीटों वाली लोकसभा में आगे उनकी सत्ता नहीं आ सकती। इसलिए 850 सीटों वाली स्थिति तैयार कर आरक्षण लाना चाह रहे हैं। श्रीमती संगीता सिन्हा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 3 लाख है। छत्तीसगढ़ सरकार ने महतारी वंदन की राशि देने के लिए 70 लाख महिलाओं का चयन किया। उनमें भी 68 लाख महिलाओं को ही इसका लाभ मिल पा रहा है।
सदन में किसने
क्या कहा…
0 मोदी जी 2029 से महिला आरक्षण देना चाह रहे हैं। विरोध करने वालों को इस बात का अंदाज़ा नहीं है। कांग्रेस 70 साल तक अफवाहें फैलाने का काम करती रही। यह नया वाला भारत है।
अरुण साव (उप मुख्यमंत्री)
0 29 सितंबर 2023 को महिला आरक्षण बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हुए थे। तब अमित शाह ने देशवासियों को बता दिया था कि पहले परिसीमन होगा, उसके बाद ही यह लागू होगा। आज इस सदन में अरुण साव व सुनील सोनी जो उपस्थित हैं, ये दोनों भी उस समय सांसद थे। तब राज्यसभा व लोकसभा दोनों सदन से यह बिल पारित हुआ था, जिसे अब कि बार गिरा दिया गया।
रेणुका सिंह (भाजपा)
0 लता उसेंडी के साथ उनकी पार्टी ने न्याय किया होता तो आज वे सामने मंत्री वाली कुर्सी पर बैठी होतीं।
संगीता सिन्हा (कांग्रेस)
0 कांग्रेस की बहनें इसलिए दुखी हैं क्योंकि उनकी पार्टी में लोग संविदा में चलते हैं।
राजेश मूणत (भाजपा)
0 18 राज्यों में भाजपा वालों की सरकार है। दिल्ली छोड़ एक भी ऐसा राज्य बता दें जहां इनकी कोई महिला मुख्यमंत्री हो।
व्दारिकाधीश यादव (कांग्रेस)

