प्राची ठाकुर ने कहा- “कुछ तो बात है, तभी बॉलीवुड वालों की नज़र छत्तीसगढ़ पर…”

● ‘महूं दिलवाला तहूं दिलवाली’ की लीड एक्ट्रेस से ख़ास बातचीत

मिसाल न्यूज़

12 जून को पूरे छत्तीसगढ़ में रिलीज़ होने जा रही छत्तीसगढ़ी फ़िल्म ‘महूं दिलवाला तहूं दिलवाली’ में प्राची ठाकुर दिलवाली के रोल में नज़र आएंगी। यानी हीरो आयुष राजवैद्य के अपोज़िट। बहुत ही कम उम्र में मुम्बई की सीरियलों की दुनिया में स्थापित हो चुकीं प्राची ने हालांकि फ़िल्म के शूट के लिहाज़ से छत्तीसगढ़ में बहुत ही कम समय गुज़ारा है, लेकिन छत्तीसगढ़ी सिनेमा के भविष्य को लेकर काफ़ी कॉन्फिडेंट हैं। कहती हैं- “यहां कुछ तो बात है, तभी तो बॉलीवुड वालों की नज़र छत्तीसगढ़ पर है।“

‘महूं दिलवाला तहूं दिलवाली’ के प्रमोशन के लिए मुम्बई से रायपुर पहुंची प्राची से ‘मिसाल न्यूज़’ ने ख़ास बातचीत की, जो बिना किसी कांट-छांट के यहां प्रस्तुत है-

0 सबसे पहले अपना पिछला कुछ बताएं…

00 दिल्ली का मेरा बर्थ है। पापा राजेन्द्र ठाकुर हिमाचल प्रदेश के हैं और मम्मी मोनिका ठाकुर चंडीगढ़ की। छह साल की उम्र में गार्जियन मुझे मुम्बई लेकर आ गए थे। चाइल्ड आर्टिस्ट के रुप में करियर की शुरुआत हुई। जो शुरु में काम किया वह न्यूज़ पेपर का एड था। महानायक अमिताभ बच्चन जी के साथ स्टेप एप का एड करने का अवसर मिला। नौ-दस  साल की थी, ‘मेरे डैड की दुल्हन’ पहला सीरियल किया। आगे चलकर ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’, ‘प्रतिज्ञा’ एवं ‘जुनून’ जैसे काफ़ी पॉपुलर सीरियल किये। मेरी एक शार्ट मूवी ‘एक झलक’ काफ़ी पसंद की गई। अजय देवगन जी एवं सिद्धार्थ मल्होत्रा जी जैसे बड़े कलाकारों के साथ ‘थैंक गॉड’ मूवी की। समीरा रेड्डी के साथ मेरी फ़िल्म ‘चिमनी’ आने वाली है।

0 चेहरा तो मासूम बच्ची की तरह लगता है…

00 (हॅसते हुए) वैसा ही समझ लीजिए। दिल्ली में 11 क्लास  का एक्ज़ाम देने वाली हूं।

0 दिन रात सीरियल… फिर पढ़ने का समय कब मिलता होगा…

00 जब भी लंच या डिनर का ब्रेक होता है, पढ़ती हूं। मेरा मानना है आप कम एज़ में ही सही कितने भी बड़े काम में क्यों व्यस्त न हों, आपको जानने वाले कितने ही क्यों न हों, लेकिन एजुकेशन ज़रूरी है।

0 वो सवाल जो पहले होना था, एक्टिंग की तरफ जाने सबसे ज़्यादा सपोर्ट किसका रहा…

00 मम्मी का। मेरी तरह मम्मी को भी बचपन से एक्टिंग व डॉस का बड़ा शौक था। लेकिन नाना-नानी के घर का माहौल पुराने ख़यालात वाला था। वह आइने के सामने डॉस किया करती थीं। उन्होंने तय कर लिया था जो सपना पूरा नहीं हो सका, बेटी में पूरा होते देखेंगी।

0 मुम्बई से छत्तीसगढ़ की तरफ रुख़, ‘महूं दिलवाला तहूं दिलवाली’ कैसे मिली, किस तरह का रोल है…

00 डायरेक्टर नीरज विक्रम सर ने मुझे इस मूवी के लिए कास्ट किया। भारी एटीट्यूड वाली लड़की रागिनी का रोल है, जो अपने में मस्त रहती है।

0 हीरो आयुष राजवैद्य भी सीजी सिनेमा के एकदम नये हीरो हैं, उनके साथ तालमेल कैसा रहा…

00 आयुष हर माहौल में काफ़ी अच्छे से एडजेस्ट हो जाते हैं। हमने काफ़ी मस्ती भरे माहौल में काम किया।

0 हिन्दी-अंग्रेज़ी बोलती रही हो, यहां तो छत्तीसगढ़ी बोलना था…

00 हां, यहां सब कुछ मेरे लिए नया था। भाषा तो एकदम नई ही। प्रोड्यूसर रॉकी दासवानी जी एवं टीम की सीनियर मेम्बर संतोषी दीदी ने काफ़ी उत्साह बढ़ाया। रात में डायलॉग याद किया करती थी। छत्तीसगढ़ी बोलने और समझने में डीओपी (कैमरा) सिद्धार्थ सिंह जी का अहम् रोल रहा।

0 डायरेक्टर नीरज विक्रम के बारे में क्या कहना चाहेंगी…

00 बहुत प्यारे इंसान हैं। शांत इंसान। शूट के दौरान मैंने उन्हें कभी गुस्सा करते नहीं देखा। रॉकी जी व विक्रम जी उम्र में बड़े हैं लेकिन वे यूनिट के हर सदस्य से बातचीत किसी दोस्त की तरह ही करते थे।

0 क्या दोबारा छत्तीसगढ़ी फ़िल्मों में काम करना चाहेंगी…

00 अच्छी स्टोरी और अच्छे डायरेक्टर हों तो क्यों नहीं..

0 छत्तीसगढ़ी सिनेमा का फ्यूचर कैसा लगा रहा है…

00 बहुत अच्छा

0 वो कैसे…

00 मैं छत्तीसगढ़ी भाषा से और ऊपर उठकर बात करूं, कुछ तो इस स्टेट में बात है, तभी तो कंगना रनावत जैसी आर्टिस्ट अपनी फ़िल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के प्रमोशन के लिए यहां पहुंची। मैंने सुना है बॉलीवुड के बड़े से बड़े लोग यहां आते रहते हैं।

0 कोई ऐसी बात जो बहुत कम लोगों को पता हो…

00 आप मुझे इस कम उम्र वाली लड़की को इतनी बात करते देख रहे हैं। आपको बताऊं 3 साल की उम्र तक मैंने बोलना नहीं शुरु किया था। घर वाले गूंगी-गूंगी पूकारा करते थे।

शुभ फ़िल्म्स के ऑफ़िस में प्राची के साथ ‘मिसाल न्यूज़’ के चीफ़ एडिटर अनिरुद्ध दुबे

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