‘लव लेटर’ के हर गाने का कहानी से गहरा रिश्ता- उत्तम तिवारी

मिसाल न्यूज़

छत्तीसगढ़ी सिनेमा में जिन डायरेक्टरों का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है, उत्तम तिवारी उनमें एक हैं। उनकी छत्तीसगढ़ी फ़िल्म ‘लव लेटर’ 17 जून को चमचमाती स्क्रीन पर पहुंच रही है। उत्तम तिवारी ने न सिर्फ इस फ़िल्म का डायरेक्शन किया है, बल्कि म्यूज़िक भी उन्हीं का है। ‘लव लेटर’ के गानों की यू ट्यूब पर धूम मची हुई है। तिवारी जी कहते हैं कि ‘लव लेटर’ के हर गाने का फ़िल्म की कहानी के साथ गहरा रिश्ता है।

यह पूछने पर कि ‘लव लेटर’ क्या है और इसे लिखने की कल्पना कैसे ज़ेहन में आई, उत्तम तिवारी कहते हैं- “ये वाट्स अप और ई मेल का ज़माना है। ऐसा लगता है कि लोग चिट्ठी लिखना भूल गए। हो सकता है कि ‘लव लेटर’ का पोस्टर देखकर आपको लगे कि यह प्यार मोहब्बत वाली कहानी होगी। इसमें कोई दो मत नहीं की इसमें प्यार मोहब्बत है, लेकिन इसके अलावा भी बहुत कुछ है। फ़िल्म में कुछ पुरानी चीज़ों को याद दिलाने की कोशिश की गई है। यह फ़िल्म हर दौर के दर्शकों को पसंद आएगी।

आजकल आपकी फ़िल्मों में ‘लव’ शब्द का इस्तेमाल ज़्यादा होने लगा है, यह ज़िक्र करने पर तिवारी जी हॅस पड़ते हैं और कहते हैं- “लव या प्यार शब्द की कम शब्दों में व्याख्या नहीं की जा सकती। जब से यह दुनिया अस्तित्व में आई है तब से प्यार है। माना कि मेरी फ़िल्म ‘आई लव यू-1’, ‘आई लव यू-2’ एवं ‘लव लेटर’ में लव शब्द आया है लेकिन प्यार कोई एक लड़के और लड़की के बीच ही तो नहीं होता। परिवार के सदस्यों और मित्रों के प्रति भी तो प्रेम का भाव होता है। शुरु में मेरी फ़िल्मों के टाइटल ‘मितान 420’, ‘सरपंच’ एवं ‘राजा छत्तीसगढ़िया’ जैसे हुआ करते थे, फिर प्रोड्यूसरों की भावनाओं का भी सम्मान करना होता है। लव शब्द उन्हीं का सूझाया हुआ है। मैंने महसूस किया की लव शब्द प्रोड्यूसर के लिए लकी ही रहा।“

मन कुरैशी के साथ आपकी यह पांचवीं फ़िल्म है, उन पर इतने भरोसे का कारण? उत्तम तिवारी कहते हैं- “मन नैचुरल आर्टिस्ट हैं। सामान्य बातचीत में भी वह हीरो लगते हैं। सबसे अहम् बात तो ये कि उनके और मेरे बीच काफ़ी अच्छी अंडर स्टैंडिंग है। वो अड़ियल नहीं हैं। अनावश्यक दखलंदाजी नहीं देते। सरल इंसान हैं। कभी-कभी उनकी तरफ से अच्छे सूझाव भी आते हैं कि तिवारी जी क्यों न इस सीन को हम ऐसा करें। जब उस पर गंभीरता से सोचता हूं तो लगता है यह सही है। उनका सूझाव फ़िल्म के हित में होता है।“

सृष्टि तिवारी मन के अपोजिट हैं और यह उनकी पहली फ़िल्म है उनके साथ कैसा अनुभव रहा? पूछने पर वे कहते हैं- “लव लेटर की जब स्क्रीप्ट फाइनल हुई तभी तय हो चुका था नई हीरोइन रखेंगे। सृष्टि ने सोशल मीडिया में कोई रील पोस्ट की थी। उसे देखने के बाद प्रोड्यूसर व्दय अमित जैन व तरूण सोनी ने उनकी तस्वीर मुझे दिखाई। वे पहले से फैशन व मॉडलिंग की दुनिया से जुड़ी रही हैं। हमने उनको बुलवाया। 10-15 मिनट उनका ऑडिशन लिया, जिसमें वे परफेक्ट लगीं। हमें थोड़ा रफ किस्म की लड़की चाहिए थी, सृष्टि में वह बात नज़र आ रही थी। उनको सैलेक्ट करके हमने कोई ग़लती नहीं की। उन्होंने 100 प्रतिशत अपना काम किया है। फिर जिस तरह लगातार छत्तीसगढ़ी फ़िल्में बन रही हैं, एक-दो चेहरे से काम नहीं चलने वाला। कई चेहरों की ज़रूरत है। सृष्टि जैसे नये चेहरे का आना स्वागत योग्य है।“

‘लव लेटर’ में संगीत भी आपका ही है। इसके गाने पहले ही काफ़ी हिट हो चुके हैं, निश्चित रूप से यह समय आपके लिए  खुशियों वाला है, उत्तम तिवारी कहते हैं- “वाकई इसके गाने काफ़ी पापुलर हो गए हैं। ख़ूब वायरल हो रहे हैं। लोग रील बना-बनाकर डाल रहे हैं। फ़िल्म एक भी गाना भर्ती का नहीं है। सब कहानी से जुड़े हुए हैं।“

प्रोड्यूसर द्वय अमित जैन व तरूण सोनी फ़िल्म व्यवसाय के घाघ लोग माने जाते हैं, इनके साथ कैसा अनुभव रहा? यह पूछने पर वे कहते हैं- “अमित जैन का परिवार कला के प्रति समर्पित रहा है। उनके पिता संतोष जैन जी व मेरे पिता राम कैलाश तिवारी जी दोनों नाट्य जगत से जुड़े हुए थे। दोनों ने साथ कई ड्रामे किये। यह सौभाग्य है कि अब दूसरी पीढ़ी साथ काम कर रही है। तरूण सोनी से प्रथम मुलाक़ात मेरी पहली फ़िल्म ‘मितान 420’ की रिलीज़िंग के समय हुई थी। मेरी फ़िल्म ‘राजा छत्तीसगढ़िया-1’ के डिस्ट्रीब्यूशन का काम तरूण ने ही संभाला था। ‘राजा छत्तीसगढ़िया-1’ मेरी पहली सुपरहिट फ़िल्म थी। उस फ़िल्म  की सफलता के पीछे जो कारण रहे थे, उनमें एक तरूण भी थे। वह काफ़ी एनर्जिक हैं। ‘लव लेटर’ के लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

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