● कारवां (28 अगस्त 2022)- सीएम हाउस में पोरा तीजा- दिल्ली तक पहुंचेगी बात

■अनिरुद्ध दुबे

इस साल भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास में पोरा तीजा त्यौहार की धूम रही। सीएम हाउस में पोरा तीजा में अनुशासन व गरिमा बने रहे को ध्यान में रखते हुए केवल महिलाओं को आमंत्रित किया गया था। पूजा में चढ़ाए जाने वाले कुछ व्यंजन स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की धर्मपत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल ने बनाए थे। श्रीमती बघेल व्रत व त्यौहारों में फलाहार या भोग प्रसाद खुद अपने हाथों से बनाने की परंपरा का निर्वहन बरसों से करती आ रही हैं। पोरा तीजा में शामिल होने ख़ास तौर पर महिला कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष नेटा डिसूजा, राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक, राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन, अल्का लांबा एवं राधिका खेड़ा आई हुई थीं। 2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से सरकार व पार्टी स्तर पर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी कैसे आलाकमान तक पहुंचे इसका समीकरण सलाहकार लोग पहले से ही बैठाकर रखे हैं। पोरा तीजा का आनंद लेकर जब ये नेत्रियां दिल्ली लौटेंगी तो सीएम हाउस के इस भव्य आयोजन की बात आलाकमान तक तो पहुंचेगी ही पहुंचेगी। यानी मुखिया का जलवा बरकरार रहना है।

कांग्रेस छोड़ने वाले शेरगिल-

आज़ाद का छग से वो रिश्ता

कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने पार्टी की सदस्यता से पिछले दिनों इस्तीफा दे दिया। शेरगिल के इस्तीफ़े की हल्की-फुल्की चर्चा छत्तीसगढ़ में भी रही। बात 2018 के नवंबर-दिसंबर की है जब विधानसभा चुनाव के समय में शेरगिल को ख़ास मिशन के तहत दिल्ली से छत्तीसगढ़ भेजा गया था। तब वे काफ़ी दिनों तक रायपुर रहे थे। राजीव भवन में होने वाली चुनावी प्रेस कांफ्रेंस में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। अक्सर देखने में आता है कि प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मीडिया की तरफ से भेड़िया धसान स्टाइल में एक साथ कई लोग सवाल करने लग जाते हैं। शेरगिल ने इस पर रोक लगाई थी। वह मीडिया से जुड़े हर व्यक्ति को सवाल करने का मौका देते थे, लेकिन क्रमवार। उसी बीच राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सूरजेवाला, जयवीर शेरगिल, राधिका खेड़ा एवं प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के तत्कालिक चेयरमैन शैलेश नितिन त्रिवेदी का हैलिकॉप्टर से बस्तर चुनावी दौरा भी हुआ था। कम उम्र के सुलझे हुए नेता शेरगिल का पार्टी छोड़कर चले जाना निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ के उन नेताओं को खला है जिनके उनसे मित्रवत संबंध रहे हैं। शेरगिल ने यह कहते हुए पार्टी छोड़ी कि “चाटुकारिता देश की सबसे पुरानी पार्टी को दीमक की तरह चाट रही है। कांग्रेस में इस समय लिए जा रहे फैसले जनहित और देशहित के लिए नहीं बल्कि कुछ लोगों के निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए होते हैं।“ शेरगिल के इस्तीफे के बाद गुलाम नबी आज़ाद जैसे सीनियर लीडर ने भी कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया। आज़ाद का जाना यानी कांग्रेस का एक बड़ा विकेट गिरना है। आज़ाद छत्तीसगढ़ में बार-बार याद किये जाते हैं। इसलिए कि प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में यहां अजीत जोगी को मुख्यमंत्री का ताज़ पहनाने दिल्ली से जिन लोगों को भेजा गया था उनमें आज़ाद भी एक थे। मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा के समय में वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल के फार्म हाउस में उनके समर्थकों ने जमकर अपने गुस्से का जो इज़हार किया था उस घटना के भी प्रत्यक्ष गवाह आज़ाद थे।

जामवाल के बचन सुहाए

बेरोजगारी को लेकर राजधानी रायपुर में हुए सीएम हाउस घेराव आंदोलन के बाद से भाजपा के बड़े-छोटे चेहरों पर ठीक वैसी ताज़गी दिखने लगी है जैसा कि लंबे समय तक बीमार  रहा कोई मरीज़ पूरी तरह स्वस्थ हो जाने के बाद तरोताज़ा होकर काम पर लौट आया हो। भाजपा में ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कुछ लोगों का कहना है कि नये क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल ने यहां आकर पार्टी के कुछ ख़ास चेहरों को जो डोज दी उसने असर दिखाना शुरु कर दिया है। रामचरित मानस के दोहे में एक लाइन आती है- “जामवंत के बचन सुहाए, सुनि हनुमंत हृदय अति भाए।“ छत्तीसगढ़ में जामवाल के सुंदर वचन का करिश्मा दिखने लगा है। जामवाल हिमाचल प्रदेश से हैं। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा भी हिमाचल प्रदेश से ही हैं। एक समय में नड्डा छत्तीसगढ़ के प्रभारी भी रहे थे, अतः छत्तीसगढ़ की राजनीतिक फिज़ा को वे अच्छे से जानते समझते रहे हैं। नड्डा जी ने जामवाल को छत्तीसगढ़ भेजा है तो काफ़ी सोच-समझकर ही भेजा है। माना जा रहा है ऊपर वालों व्दारा साफ शब्दों में यहां के सारे सीनियर भाजपाइयों को आक्रामक गेंदबाजी करने कहा जा चुका है। आक्रामकता की झलक किसी न किसी रूप में दिखनी शुरु हो भी गई है।

मोदी पर पुस्तक, शाह

और ओबीसी फैक्टर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर केन्द्रित पुस्तक ‘मोदी @ 20’ पर राजधानी रायपुर में आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मौजूद रहना बड़ी राजनीतिक हलचल पैदा कर गया। कहने को तो यह कार्यक्रम बौद्धिक वर्ग के लिए आयोजित था लेकिन ऑडिटोरियम के भीतर की फिज़ा कुछ दूसरी ही थी। अमित शाह अपने उद्बोधन में चार से पांच बार राहुल गांधी पर प्रहार करते नज़र आए। साथ में यह कहने से पीछे नहीं रहे कि छत्तीसगढ़ में एक बार फिर सरकार बनाने का मौका तो दीजिए नक्सलवाद का समाधान चुटकी बजाकर निकाल देंगे। इस पूरे आयोजन में कलेक्टरी छोड़कर भाजपा में आए ओ.पी. चौधरी की अहम् भूमिका रही। मंच संचालन चौधरी ने ही किया। इस दौरान चौधरी दो चार वाक्य छत्तीसगढ़ी में भी बोले। अमित शाह के भाषण के अलावा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव का स्वागत भाषण, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का भाषण एवं सांसद सुनील सोनी की ओर से आभार प्रदर्शन हुआ। भाजपा में इस समय ओबीसी फैक्टर जबरदस्त काम कर रहा है। हाल ही में बड़ा फेरबदल करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं विधानसभा नेता प्रतिपक्ष का दायित्व ओबीसी वर्ग को सौंपा जा चुका है। मोदी की पुस्तक वाले इस कार्यक्रम में भी मंच पर ओबीसी का पूरा वज़न दिखा। स्वागत भाषण देने वाले प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ओबीसी, संचालन कर रहे ओ.पी. चौधरी ओबीसी व आभार प्रदर्शन करने वाले सुनील सोनी भी ओबीसी। इसके अलावा एक और ओबीसी नेता नारायण चंदेल मंच पर विराजमान थे। चंदेल हाल ही में नेता प्रतिपक्ष बने हैं। संकेत यही मिल रहे हैं कि अगले साल छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में ओबीसी फैक्टर जमकर काम करेगा।

सुर्खियों में धर्मजीत व प्रमोद

‘मोदी @ 20’ किताब पर आयोजित कार्यक्रम वैसे तो पूरी तरह भाजपा का था लेकिन वहां पर मंच के सामने अग्रिम पंक्ति में बैठे जोगी कांग्रेस यानी जनता कांग्रेस के विधायक व्दय धर्मजीत सिंह एवं प्रमोद शर्मा भी सुर्खियों में रहे। ये दोनों विधायक कभी अपनी ओर से खुलकर तो कुछ नहीं बोले लेकिन सेमिनार में मौजूद बहुत से नेता एवं मीडिया कर्मी यही जानने की कोशिश में लगे रहे कि क्या हवा का रूख़ इस समय भाजपा की तरफ है।

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